उत्तराखंड रोडवेज की बसों से लोगों को हरिद्वार और बरेली ले जाया जा रहा है। उत्तराखंड के प्रवासियों को लेकर लेकर आ रही यूपी की बसों में उन्हेंं उनके गंतव्य स्थलों को भेज दिया जाएगा। इसके लिए रूट प्लान तैयार किया गया है।
इसी तरह राजस्थान की बसें उत्तराखंड के प्रवासियों को लेकर हरिद्वार पहुुंचेंगी। यहां राज्य में ठहरे राजस्थान के लोगों को इन्हीं बसों में भेजा जाएगा। जहां से उत्तराखंड रोडवेज की बसें यहां के लोगों को उनके गंतव्य तक पहुंचाएंगी।
गुरुवार को राहत केंद्रों में रह रहे नेपाली नागरिकों को स्वदेश भेजे जाने के बाद शुक्रवार को उत्तर प्रदेश और राजस्थान के मजदूरों को भी उनके प्रदेशों को भेज दिया गया। राहत केंद्रों में रह रहे 83 मजदूरों को रोडवेज की चार बसों से रवाना किया गया। जिसमें 82 मजदूरों को टनकपुर और एक राजस्थान निवासी मजदूर को हल्द्वानी भेजा गया।
एक माह से भी ज्यादा समय से देहरादून जिले में लॉकडाउन में फंसे 30 हजार लोग अपने-अपने घर जाने को तैयार बैठे हैं। थाना और पुलिस चौकी प्रभारियों ने मजदूरों से बात कर इनकी सूची मुख्यालय को भेज दी है। एसपी क्राइम लोकजीत सिंह ने बताया कि सबसे ज्यादा 15243 श्रमिक उत्तरप्रदेश के हैं। 13 हजार मजदूर बिहार के रहने वाले हैं।
शनिवार को पहले चरण में उत्तरप्रदेश और राजस्थान के मजदूरों को उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश की बसों में भेजने का काम शुरू किया गया । एसपी सिटी श्वेता चौबे ने बताया कि अधिकतर मजदूर दून में काम करने के पक्ष में हैं। उनका कहना है काम न होने के कारण अब पैसा उनके पास नहीं हैं। यदि काम मिलता तो कुछ कमाकर घर जाते। लेकिन, लॉकडाउन के कारण तस्वीर साफ नहीं हैं। ऐसे में उनके सामने घर उनकी मजबूरी है।
श्रमिकों की संख्या
उत्तर प्रदेश -15243, बिहार-13048, झारखंड-435, पश्चिम बंगाल -220, मध्य प्रदेश-193, छत्तीसगढ़-172, जम्मू कश्मीर-242, हरियाणा-94, राजस्थान-86, हिमाचल प्रदेश- 78, पंजाब-47, दिल्ली-54, महाराष्ट्र-28, असम-21, चंडीगढ़-14, उड़ीसा-05, गुजरात-04, कर्नाटक-02, तेलांगना-01, नेपाल-459, उत्तराखंड-127।
निर्माण कार्यों में तेजी लाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने बाहरी राज्यों से कुशल मजदूरों को लाने की योजना पर काम शुरू कर दिया है। केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्रालय को पत्र भेजकर कुशल मजदूरों को राज्य में लाने की व्यवस्था कराने का अनुरोध किया गया है।
शासकीय प्रवक्ता और कैबिनेट मंत्री मदन कौशिक ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के दौरान गडकरी से कुशल श्रमिकों को दूसरे राज्यों से लाए जाने की अनुमति मांगी थी। इस संबंध में गडकरी ने लिखित प्रस्ताव देने को कहा था, ये प्रस्ताव भेज दिया गया है।
सूत्रों का कहना है कि कुशल श्रमिकों के अभाव में राज्य सरकार की चारधाम आलवेदर रोड, ऋषिकेश कर्णप्रयाग रेल परियोजना और महाकुंभ में चल रहे सड़कों और पुलों के निर्माण कार्यों को आगे बढ़ाने में दिक्कत हो रही है। परियोजनाओं की कार्यदायी एजेंसी बाहरी राज्यों के कुशल श्रमिकों पर ही निर्भर है। यही वजह है कि कौशिक ने गडकरी के समक्ष यह मसला उठाया था।
सीमेंट, सरिया लाने की अनुमति मांगी
केंद्रीय मंत्री को भेजे गए पत्र में निर्माण कार्यों में इस्तेमाल होने वाले सीमेंट, सरिया व स्टील बाहरी राज्यों से लाने की अनुमति भी मांगी गई है। राज्य में इनका उत्पादन न के बराबर है। पूरी तरह से दूसरे राज्यों पर निर्भरता है।
कुछ दिन पूर्व वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर कुछ मसलों को लेकर चर्चा हुई थी। मंत्रालय को पत्र भेज दिया गया है। उसमें उन सभी बिंदुओं को शामिल किया गया है, जिन पर बैठक में चर्चा हुई थी।
- ओम प्रकाश, अपर मुख्य सचिव, लोनिवि
लॉकडाउन में फंसे हुए लोगों को लेकर पहला जत्था पौड़ी पहुंच गया है। जिला प्रशासन ने ग्राम प्रधानों व निकाय प्रशासन को एहतियात बरतते हुए सभी लोगों को होम क्वारंटीन किए जाने के निर्देश दिए हैं।
शनिवार को लॉकडाउन के चलते देहरादून जिले के विभिन्न क्षेत्रों में फंसे हुए पौड़ी जनपद के लोगों का पहला जत्था मुख्यालय पहुंचा। डीएम धीराज सिंह गर्ब्याल ने बताया कि 12 बसों में कुल 426 लोग जनपद पौड़ी पहुंचे हैं। इनमें 278 पौड़ी और 148 कोटद्वार पहुंचे।
उन्होंने कहा कि जनपद पहुंचे लोगों की स्वास्थ्य जांच के बाद उन्हें अपने-अपने घरों को रवाना किया जाएगा। पौड़ी जनपद के लोगों को संस्थागत क्वारंटीन किया जाएगा। उधर, कोटद्वार पहुंचे 148 लोगों को जांच के बाद होम क्वारंटीन भेजा जाएगा।
रुद्रप्रयाग के 4000 प्रवासियों ने किया घर आने के लिए आवेदन
लॉकडाउन के कारण अन्य राज्यों में फंसे प्रवासियों में 4000 ने उन्हें अपने गांव भेजने के लिए राज्य सरकार को आवेदन किया है। उत्तर प्रदेश से रविवार से वापसी शुरू होगी। आने वाले दिनों में यह संख्या काफी संख्या में बढ़ने की संभावना है। वहीं, जिला प्रशासन, पुलिस और स्वास्थ्य विभाग के सामने इन लोगों को गांवों में सफल तरीके से होम व इंस्टीट्यूशन क्वारंटीन करना किसी चुनौती से कम नहीं है।