प्रदेश के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले 50 फ़ीसदी बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं है। जिन 50 फीसदी बच्चों के पास स्मार्टफोन है, उनमें से कई के पास इंटरनेट की उपलब्धता नहीं है। ऐसे में ऑनलाइन पढ़ाई उनके लिए कितनी फायदेमंद होगी, कह पाना मुश्किल है।
पूर्व विभागीय अधिकारी के अनुसार सरकारी स्कूलों में ज्यादातर बेहद गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं। उनमे से अधिकांश बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं है। विभाग स्मार्टफोन के जरिए बच्चों को ऑनलाइन पढ़ाने का दावा तो कर रहा है। लेकिन बिना फोन वाले बच्चों का क्या होगा?
हालांकि शिक्षक नेता इस फैसले पर सरकार के साथ खड़े हैं। उनके अनुसार जिन बच्चों के पास स्मार्टफोन उपलब्ध हैं, कम से कम ऑनलाइन पढ़ाई का उन्हें फायदा मिल सकता है। जिन बच्चों के पास स्मार्टफोन नहीं है, उनके लिए भी कुछ सोचा जाना चाहिए। ताकि वह लॉकडाउन के दौरान घर पर पढ़ाई कर सकें।