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Lockdown: हरिद्वार में 82 जमाती वन गुर्जर अब रहेंगे होम क्वारंटीन, बाहर निकलने पर दर्ज होगा मुकदमा

Wed, 22 Apr 2020 05:08 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, हरिद्वार

सार

  • बस्ती पर लगाई पाबंदी को हटाने पर शासन स्तर से लिया जाएगा निर्णय
  • वन गुर्जर बस्ती से 98 लोगों को कलियर में संस्थागत क्वारंटीन किया गया था।
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- फोटो : प्रतीकात्मक तस्वीर
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विस्तार
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हरिद्वार में 21 दिनों तक संस्थागत क्वारंटीन रहे गैंडीखाता की वन गुर्जर बस्ती के 82 जमाती वन गुर्जरों को मंगलवार की देर रात्रि को छोड़ दिया। अब वे 28 दिनों तक होम क्वारंटीन रहेंगे। अभी 14 वन गुर्जर संस्थागत क्वारंटीन रहेंगे। बस्ती पर लगाई पाबंदी को हटाने का निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा, लेकिन वहां पर दूध बिक्री की पाबंदी शीघ्र ही हटा दी जाएगी।

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एक से तीन अप्रैल तक वन गुर्जर बस्ती से 98 लोगों को कलियर में संस्थागत क्वारंटीन किया गया था। इन वन गुर्जरों के सैंपल लेकर जांच के लिए भेजे गए थे। इन सबकी जांच रिपोर्ट निगेटिव आई थी। पिछले सप्ताह इनके बीच में से लक्सर और भगवानपुर के दो लोगों के पॉजिटिव आने पर इनकी जांच फिर से करने का निर्णय लिया गया। स्क्रीनिंग जांच में कोई लक्षण आदि सामने न आने पर जिला प्रशासन ने 82 लोगों को मंगलवार की देर रात छोड़ने का निर्णय ले लिया। सीएमओ डॉ. सरोज नैथानी ने बताया कि छोड़े गए वन गुर्जर 28 दिन तक होम क्वारंटीन रहेंगे। प्रतिदिन स्क्रीनिंग जारी रहेगी।

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सरकारी वाहनों से बस्ती में छोड़ दिया गया

उन्हें सख्त निर्देश दिए है कि यदि वह घर से बाहर मिले तो उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। एसडीएम कुश्म चौहान ने बताया कि स्क्रीनिंग जांच के बाद उन्हें सरकारी वाहनों से बस्ती में छोड़ दिया गया। अभी 14 वन गुर्जर क्वारंटीन ही रहेंगे। एसडीएम ने बताया कि बस्ती में लगाई गई पाबंदी को हटाने का निर्णय शासन स्तर से लिया जाएगा। इसकी रिपोर्ट तैयार करनी शुरू कर दी है। वहां पर किसानी कार्यों को लेकर छूट कर दी गई है।   दूध की बिक्री की अनुमति शीघ्र ही जारी कर दी जाएगी।

21 दिन से बस्ती से नहीं बिका दूध
गैंडीखाता गुर्जर बस्ती से पिछले 21 दिनों से दूध की बिक्री नहीं हो सकी है। वन गुर्जर अधिकार मंच के अध्यक्ष मौ. सफी लोधा ने बताया कि बस्ती से हजारों लीटर दूध की बर्बादी हो रही थी। गेहूं की कटाई नहीं हो पाई। गांव के लोग भूखमरी के कगार पर पहुंच गए थे। हालांकि प्रशासन की ओर से कुछ सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही थी, लेकिन वह नाकाफी हो रही थी। पाबंदी हटाए जाने के बाद से कुछ राहत मिलेगी।
 
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