लॉकडाउन के दौरान पार्थिव देह (डेड बॉडी) को पैतृक गांव ले जाने से नहीं रोका जा सकता है। पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) अशोक कुमार ने इस संबंध में सभी वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश जारी किए हैं। उन्होंने आगाह भी किया कि मेडिकल इमरजेंसी के मामलों में परमिशन देने में हीलाहवाली या लापरवाही करने से कोई अनहोनी होती है तो इसके लिए पुलिस भी परोक्ष रूप से जिम्मेदार होगी।
पुलिस महानिदेशक ने कहा कि पुलिस मुख्यालय को कुछ जिलों से इस आशय की शिकायतें मिली हैं कि डेड बॉडी को पैतृक गांव ले जाने से रोका जा रहा है, जबकि पूर्व में ही डेडबॉडी के साथ 20 लोगों के जाने के निर्देश दिए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि लॉकडाउन को पूरी दृढ़ता के साथ लागू किया जाना है, लेकिन विनम्रता और मानवीय पहलू को भी ध्यान में रखा जाना है। इसके बावजूद ऐसी शिकायतें प्राप्त होना किसी भी दृष्टि से सही नहीं है। इससे पुलिस की छवि धूमिल हो सकती है।
समाज में पुलिस के प्रति नकारात्मक संदेश भी जाएगा। उन्होंने निर्देश दिए कि लॉकडाउन के दौरान पुलिस आवश्यक सेवाओं और मेडिकल इमरजेंसी के मामले में विनम्रता और मानवीय पहलुओं का भी जरूर ख्याल रखे ताकि ऐसे मामलों में जनता को किसी दिक्कत का सामना न करना पड़े।