उत्तराखंड आपदा के बाद पहले सत्र में सदन को संभालना कांग्रेस के लिए खासी मुसीबत का सबब बन सकता है। अंदरखाने कई विधायक और मंत्री असंतुष्ट हैं। खुद विधानसभा अध्यक्ष गोविंद सिंह कुंजवाल गैरसैँण और राहत कार्य से असंतोष जताकर सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर चुके हैं। संसदीय कार्यमंत्री इंदिरा हृद्येश भी इसी जमात में शामिल हैं।
सरकार के लिए मुश्किल
इस सत्र में सरकार को विपक्ष के धारदार हमले का सामना भी करना है और अपने पुनर्निर्माण केएजेंडे को भी आगे बढ़ाना है। पर मुसीबत यह है कि इसमें सरकार को अपनों से ही परेशानी का सामना करना पड़ सकता है। एक खेमे के विधायक विकास के सवाल पर पहले ही सरकार के लिए मुश्किल खड़ी कर चुके हैं।
विपक्ष को हमलावर होने का मौका
अब आपदा में राहत और पुनर्निर्माण का एक नया एजेंडा इसमें जुड़ चुका है। केदारनाथ में राहत कार्य को लेकर स्थानीय विधायक कई बार मुख्यमंत्री के सामने नाराजगी जता चुके हैं। सदन में इनका रुख क्या रहेगा यह अभी साफ नही है। दूसरी ओर सरकार के मंत्री भी परफार्म करते नहीं दिख रहे हैं। लिहाजा सदन में विपक्ष को हमलावर होने का मौका मिल सकता है।
पिछले सत्र के अनुभव ही देखे जाएं तो विधानसभा अध्यक्ष गोविंद कुंजवाल का रुख भी सरकार केप्रति असंतुष्ट होने जैसा ही है। कुंजवाल पहले ही आपा प्रभावित क्षेत्रों में राहत नाकाफी बताकर सरकार को परेशानी में डाल चुके हैं। कुंजवाल केसाथ ही कर्णप्रयाग के विधायक एके मैखुरी भी कह रहे हैं कि सरकार गैरसैंण में होती तो ज्यादा बेहतर तरीके से पर्वतीय क्षेत्रों में विकास को अंजाम दे पाती। जाहिर है ऐसे में फ्लोर मैनेजमेंट में इस बार सत्ता पक्ष को खासी बड़ी परीक्षा से गुजरना पड़ सकता है।