दिल्ली में भले ही अरविंद केजरीवाल ने सरकारी घर छोड़ दिया हो लेकिन उत्तराखंड में ऐसी कोई गुंजाइश नहीं है।
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राज्य की संपत्ति जितना बेजा इस्तेमाल उत्तराखंड में हो रहा है उतना शायद ही दूसरे किसी राज्य में है। हालात इतने खराब है कि पात्र अपात्र की बात ही नहीं, जिसकी लाठी उसी की भैंस वाला हिसाब किताब माननीय राज्य की राजधानी देहरादून में कर रहे हैं।
बंगला मिलने के बावजूद नहीं छोड़ा विधायक हॉस्टल
नेता प्रतिपक्ष अजय भट्ट काफी दिन तक मंत्री हरक सिंह रावत को गरियाते रहे लेकिन अब बड़ा बंगला मिलने के बावजूद विधायक हॉस्टल से दो कमरों वाला आवास नहीं छोड़ा।
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मंत्री हरक सिंह ने निशंक को खूब खरी खरी सुनाई लेकिन अपने आवास के सामने चार कमरों वाले एक सरकारी बंगले को कैंप कार्यालय बना लिया है। यह कैंप कार्यालय कभी सीएम रहते हुए निशंक के पास था लेकिन अब हरक के पास है।
महेंद्र सिंह माहरा पिछला विधानसभा चुनाव हारे और बाद में केंद्रीय मंत्री हरीश रावत के सपोर्ट से राज्यसभा पहुंचे। माहरा को दिल्ली में सांसद की कोठी मिली है लेकिन विधायक हॉस्टल में अभी भी आवास संख्या 60 पर कब्जा है।
जबकि यह आवास भाजपा विधायक पूरण सिंह फर्त्याल को आवंटित है। लेकिन घर खाली नहीं होने से फर्त्याल दो साल से अस्थाई तौर पर हॉस्टल के ही गेस्ट हाउस में इस प्रत्याशा में रह रहे है कि एक दिन उन्हें आवंटित घर जल्द खाली होगा।
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कुंवर प्रणव सिंह चैम्पियन के लिए विधायक हॉस्टल में एक घर आवंटित है। वन निगम के चेयरमैन बने तो कैबिनेट मंत्री का दर्जा मिलते ही सुभाष रोड वाली वह कोठी अलॉट हो गई जिसमें पूर्व कैबिनेट मंत्री मातबर सिंह कंडारी रहते थे।
अब कुंवर प्रणव से मंत्री का दर्जा भी नहीं रहा लेकिन कोठी भी बरकरार है। भाजपा विधायक पुष्कर सिंह धामी को दायित्वधारी रहते हुए भाजपा सरकार में टाइप-4 का एक बड़ा मकान यमुना कालोनी में आवंटित हुआ था।
लेकिन वह आज भी उस पर काबिज है और विधायक हॉस्टल में भी विधायक होने के नाते घर लिए हुए हैं। पूर्व सीएम रमेश पोखरियाल निशंक दो दर्जन भर कमरों वाली एनेक्सी के साथ ही यमुना कॉलोनी में दूसरी कोठी भी रखे हुए हैं। राजेंद्र भंडारी बीसूका के उपाध्यक्ष है तो मंत्री वाले बंगले में रहते है।
अपवाद भी है पहले भी रहे
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने जरूर नैतिकता बरती, उन्होंने मुख्य विपक्षी दल का अध्यक्ष होने के बावजूद मंत्री स्तर का बंगला सरकार से नहीं लिया। अभी भी विधायक हॉस्टल में रहते हैं। जबकि वह मंत्री की कोठी के लिए पात्र है।
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पिछली सरकार में पांच साल मंत्री रहे त्रिवेंद्र सिंह रावत ने भी मंत्री की कोठी नहीं ली थी। वह डिफेंस कॉलोनी में अपने घर में ही रहे। हॉस्टल में विधायक वाला घर जरुर लिया लेकिन मंत्री की कोठी नहीं ली।
वहीं किशोर उपाध्याय मंत्री पद से हटने के बावजूद मंत्री की कोठी कब्जाए रहे। भाजपा सरकार को किशोर को जबरन बाहर करना पड़ा था।