कहते हैं होली बैर भाव भुलाकर गले मिलने का त्योहार है। लेकिन यह सियासत है जनाब। यहां जो कहते हैं, वह करते नहीं।
जरूरत पड़ने पर यहां मनाने का चलन है तो जरूरत पूरी हुए बिना न मानने का भी। नाराज भाजपा नेता बचदा को मनाया गया, लेकिन वह नहीं माने।
भाजपा के साथ कांग्रेस में भी सियासी पिचकारियों से कुछ ‘चटख और तल्ख’ रंग छूटे।
बचदा ने किया कोश्यारी का प्रचार करने से इंकार
नैनीताल से टिकट चाहने वाले पूर्व केंद्रीय राज्य मंत्री बची सिंह रावत की नाराजगी बरकरार है। यहां से पूर्व मुख्यमंत्री भगत सिंह कोश्यारी को टिकट मिलने के बाद बचदा ने नैनीताल संसदीय क्षेत्र में काम करने से मना कर दिया है। बचदा ने कहा कि मैंने केंद्रीय नेतृत्व को भी अपनी भावना से अवगत करा दिया है।
पीछे हटने को तैयार नहीं बचदा
भाजपा के सभी पदों से इस्तीफा दे चुके बचदा पीछे हटने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने साफ कहा कि मैं केवल वोट डालने के लिए नैनीताल जाऊंगा। वहां चुनाव संबंधी कोई काम नहीं करूंगा।
हालांकि, वे बाकी जगह पार्टी प्रत्याशियों के लिए काम कर सकते हैं। कहा, नैनीताल के अलावा हाईकमान जहां कहेगा वहां जाऊंगा। बचदा ने यह भी कहा कि पार्टी प्रदेश में पांचों सीटें जीतेगी।
मैंने कभी नहीं कहा कि बचदा का टिकट कटे
बचदा पार्टी के श्रेष्ठ कार्यकर्ता हैं। हम सबने मिलकर उन्हें कैसे चार बार लोकसभा चुनाव जिताया, उन्हें आभास भी नहीं होगा। मैंने कभी नहीं कहा कि बचदा का टिकट काट दो और मुझे दे दो। मुझे भरोसा है कि बचदा मेरे साथ खड़े होंगे। उनकी नाराजगी मुझसे है तो मैं खुद दूर करने की पहल करूंगा। और, यदि संगठन से है, तो बड़े नेता बात करेंगे।
-भगत सिंह कोश्यारी, नैनीताल से भाजपा प्रत्याशी
अजय टम्टा के विरोध में इस्तीफा
उधर, अल्मोड़ा लोकसभा सीट से टिकट के दावेदार रहे सज्जन लाल टम्टा ने भाजपा से इस्तीफा दे दिया है और निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा की है। यहां से अजय टम्टा को भाजपा का टिकट मिला है। भाजपा के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य सज्जन लाल ने कहा कि वे आरएसएस की काली टोपी पहनकर चुनाव लड़ेंगे और अजय टम्टा का रथ रोकेंगे।
कुछ इस तरह दिखा गांववासी का दर्द
पौड़ी से पूर्व मुख्यमंत्री बीसी खंडूड़ी को टिकट मिलने के बाद यहां से
दावेदार रहे मोहन सिंह रावत गांववासी ने फेसबुक पर कुछ पक्तियों के जरिये
अपना दर्द और आक्रोश दिखाया। उन्होंने लिखा है...संघर्ष हम करते रहे,
मैदान-ए-जंग वो लूटते रहे। रास्ता हम बनाते रहे, वो गाड़िया अपनी सरपट
दौड़ाते रहे।