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उत्तराखंड में समाप्त हो सकते हैं जिला विकास प्राधिकरण, विस कमेटी भी कर चुकी सिफारिश

Wed, 04 Nov 2020 10:55 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • भाजपा प्रदेश अध्यक्ष भगत की मांग पर मुख्यमंत्री ने दिया आश्वासन
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भाजपा प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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उत्तराखंड सरकार जिला विकास प्राधिकरणों को समाप्त कर सकती है। सत्तारूढ़ भाजपा ने अपनी ही सरकार के बनाए गए इन विकास प्राधिकरणों के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष बंशीधर भगत ने मुख्यमंत्री से विकास प्राधिकरणों को तत्काल समाप्त करने की मांग उठाई है।

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इस संबंध में उन्होंने बुधवार को मुख्यमंत्री से मुलाकात की और एक पत्र भी सौंपा। भगत का कहना है कि विकास प्राधिकरणों में भ्रष्टाचार पनप रहा है और लोग शोषण का शिकार हो रहे हैं। बकौल भगत, मुख्यमंत्री ने उनकी मांग पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है। भगत ने कहा कि पिछले दिनों उन्होंने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों का दौरा किया था। इन दौरों में लोगों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने विकास प्राधिकरणों के कामकाज को लेकर शिकायतें कीं।

उनका कहना था कि विकास प्राधिकरण जनता की अपेक्षाओं पर खरे नहीं उतरे हैं। उनका नगरीय क्षेत्रों के विकास में भी कोई खास योगदान नहीं है। इसके विपरीत जनता को परेशान किया जा रहा है। कार्यों में सरलता के स्थान पर उन्हें और अधिक कठिन बना दिया गया है। कई स्थानों पर भ्रष्टाचार की शिकायतें भी सामने आई हैं। इसलिए इन प्राधिकरणों के बने रहने का कोई औचित्य नहीं है। भगत के मुताबिक, मुख्यमंत्री ने उनकी मांग को गंभीरतापूर्वक सुना और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया।

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नियोजित विकास के लिए बनाए गए हैं प्राधिकरण

प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में विकास प्राधिकरणों का गठन नियोजित विकास के उद्देश्य से किया था। सरकार चाह रही थी कि प्राधिकरणों से जनता को सुविधा होगी, लेकिन प्राधिकरणों के शुरू होने के साथ शिकायतें आनी शुरू हो गईं कि लोगों को खूब चक्कर कटाए जा रहे हैं। नियम-कायदों के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है।

विधानसभा की कमेटी भी कर चुकी है सिफारिश
जिला प्राधिकरणों का विधानसभा में भी विरोध हुआ था। स्पीकर के आदेश पर विधानसभा सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी। बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने अपनी सिफारिशें विस अध्यक्ष को सौंपीं। ये सिफारिशें अब शासन के पास विचाराधीन हैं। कमेटी ने भी प्राधिकरणों को समाप्त करने की सिफारिश की है।
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