प्रदेश सरकार ने सभी जिलों में विकास प्राधिकरणों का गठन नियोजित विकास के उद्देश्य से किया था। सरकार चाह रही थी कि प्राधिकरणों से जनता को सुविधा होगी, लेकिन प्राधिकरणों के शुरू होने के साथ शिकायतें आनी शुरू हो गईं कि लोगों को खूब चक्कर कटाए जा रहे हैं। नियम-कायदों के नाम पर लोगों को परेशान किया जा रहा है।
विधानसभा की कमेटी भी कर चुकी है सिफारिश
जिला प्राधिकरणों का विधानसभा में भी विरोध हुआ था। स्पीकर के आदेश पर विधानसभा सदस्यों की एक कमेटी बनाई गई थी। बागेश्वर के विधायक चंदन राम दास की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने अपनी सिफारिशें विस अध्यक्ष को सौंपीं। ये सिफारिशें अब शासन के पास विचाराधीन हैं। कमेटी ने भी प्राधिकरणों को समाप्त करने की सिफारिश की है।