फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड : भंगजीरा की व्यावसायिक खेती बदलेगी किसानों की आर्थिकी, यूएसए से मिला प्रमाणीकरण 

Fri, 18 Sep 2020 02:47 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज़ डेस्क, अमर उजाला, देहरादून

सार

  • सगंध पौध केंद्र सेलाकुई ने विकसित की भंगजीरा की नई किस्म
  • एक हेक्टेयर भूमि में खेती से ढाई से तीन लाख की आमदनी
विज्ञापन
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : पेक्सेल्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड में भंगजीरा की व्यावसायिक खेती से किसानों की आर्थिकी बदलेगी। लगभग नौ सालों के शोध के बाद सगंध पौध केंद्र (कैंप) सेलाकुई ने यह नई किस्म विकसित की है।

विज्ञापन


इसमें ओमेगा का स्तर 58 प्रतिशत है। यूएसए से भी इस प्रजाति को ओमेगा के पैटर्न का प्रमाणीकरण मिल चुका है। एक हेक्टेयर भूमि पर इसकी खेती से करने से किसान को ढाई से तीन लाख की आमदनी होगी। खास बात ये है कि भंगजीरा को जंगली जानवर नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। 

उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षों से लोग अपनी जरूरत के लिए भंगजीरा की खेती करते हैं। भंगजीरा का वैज्ञानिक नाम पैरिला फ्रूटीसेंस है। सगंध पौध केंद्र ने भंगजीरा की नई किस्म तैयार है। इसमें ओमेगा का स्तर 58 प्रतिशत है। जबकि परंपरागत भंगजीरा में ओमेगा का स्तर पर 51 प्रतिशत है।
विज्ञापन


ओमेगा का स्तर ज्यादा होने से भंगजीरा का तेल ऑयल कैप्सूल बनाने के काम आएगा। यह कॉड लीवर ऑयल (मछली के तेल) का विकल्प होगा। जिसे शाकाहारी लोग इस्तेमाल कर सकेंगे। कोरिया, जापान में इसकी बड़े स्तर पर व्यावसायिक खेती होती है। 

ये होगा फायदा

भंगजीरा के तेल का उपयोग कोलेस्ट्रॉल, डायबिटीज को कम करने, रक्तचाप, कैंसर, शरीर को स्वस्थ रखने के लिए किया जाएगा। भंगजीरा आयॅल की मार्केटिंग के लिए सरकार फार्मा उद्योगों के साथ अनुबंध करेगी। 

भंगजीरा की नई प्रजाति विकसित करने में एक बड़ी कामयाबी मिली है। यूएसए से भी ओमेेगा स्तर पर प्रमाणीकरण हो गया है। पर्वतीय क्षेत्रों में भंगजीरा की व्यावसायिक खेती किसानों की आर्थिकी को बदल सकती है। यह वर्षा ऋतु की फसल है। बंजर भूमि पर भी इसकी खेती हो सकती है और जंगली जानवर इसे नुकसान नहीं पहुंचाते हैं।
विज्ञापन

- नृपेंद्र सिंह चौहान, सीईओ, सगंध पौध केंद्र

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें