जुबिन नौटियाल ने कहा कि पहाड़ में जमीन की खरीद-फरोख्त पिछले कुछ सालों में तेजी से बढ़ी है। ऐसे में जरूरी है कि सरकार ऐसा भू कानून तैयार करे, जिससे पहाड़ के लोगों के हितों की रक्षा हो सके और जल, जंगल-जमीन पर उनका अधिकार बना रहे।
बातचीत के दौरान जुबिन ने कारगिल युद्ध के हीरो रहे शहीद कैप्टन विक्रम बत्रा के जीवन से प्रेरित फिल्म ‘शेरशाह’ में गाए अपने गीत ‘काटूं कैसे राता ओ सांवरे, जिया नहीं जाता सुन बावरे, के रातां लंबेया लंबेया रे’ भी गुनगुनाया।
मौजूदा समय में फिल्मों में अर्थहीन गीतों को लेकर जुबिन का कहना था कि उनका कोई भी गाना ऐसा नहीं है जो लोगों को अच्छा संदेश न देता हो। कहा कि वह पिछले कुछ साल से अरिजीत सिंह के साथ पुराने दौर के गीतों को वापस लाने के लिए प्रयासरत हैं।
कहा कि संगीत केवल मनोरंजन का साधन नहीं है बल्कि हम इसके माध्यम से युवाओं को अच्छे कार्यों के लिए भी प्रेरित कर सकते हैं। जीवन में तरक्की पाने के लिए कठोर मेहनत की जरूरत होती है। यदि व्यक्ति जीवन में अपनी मंजिल पाना चाहता है तो इसके लिए उसे खुद ही संघर्ष करना होगा। बकौल जुबिन छोटा और आसान रास्ता आकर्षक होता है लेकिन कठिन मार्ग ही सफलता की कुंजी है।