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इन महिला पुलिस अधिकारियों को देख कांपता है अपराध

Tue, 08 Mar 2016 01:18 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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पु‌लिस अफसर - फोटो : amar ujala
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उत्तराखंड पुलिस विभाग में पुरुषों के साथ महिलाएं भी कंधे से कंधा मिलाकर काम करने में पीछे नहीं है। कानून व्यवस्था और अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के साथ विवेचना में महिला अधिकारियों ने मिसाल कायम की है।
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इनमें एक नाम है अपर पुलिस अधीक्षक ममता बोरा का है। 2005 की पीपीएस अधिकारी बोरा नैनीताल, उधम सिंह नगर और देहरादून में सीओ और अपर पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी निभाई है। कई चर्चित मामलों की विवेचना में ममता बोरा की क्षमताओं का बेहतर प्रदर्शन किसी से छिपा नहीं है।

जेपी जोशी रेप कांड, हरियाणा के पूर्व सांसद के बेटे सांगवान यौन शोषण के अलावा टिहरी के चौरास पुल के गिरने के मामले की विवेचना उनके द्वारा निस्तारित की गई। इस मामले में 13 अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ आरोप पत्र भेजा गया। एलबीएस अकादमी में रूबी चौधरी के फर्जी प्रशिक्षु आईएएस प्रकरण में उनके द्वारा जांच की गई।
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आपरेशन स्माइल के तहत प्रदेश भर में गुम हुए 766 बच्चों की बरामदगी पर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें दिल्ली में सम्मानित किया। फिलहाल नारी निकेतन से गई संवासिनी के सत्यापन के लिए गठित टीम में ममता बोरा शामिल है।

बोरा कहती है कि हर स्तर पर महिलाओं को सम्मान और स्वतंत्रता की जरूरत है। केवल महिला दिवस पर याद करने से ऐसा होने वाला नहीं है। ग्रामीण अंचलों में महिलाओं को कितनी स्वतंत्रता है। यह किसी से छिपा नहीं है। इस सोच में बदलाव लाने की जरूरत है।

महिला उप निरीक्षक श्वेता भट्ट भी महिला उत्पीड़न के फ्रंट पर बड़ी जिम्मेदारी निभा रही है। राज्य स्तर से 1090 पर आने वाली शिकायतों पर कार्रवाई और पीड़िता से समन्वय बनाकर संतुष्ट करने के काम को बेहतर ढंग से पूरा करती है। मुख्यालय स्तर पर मिलने वाली शिकायतों की जांच में दूध का दूध और पानी का पानी करने की पहचान बनाई है।

राज्य स्तर पर गठित वूमन सेल का भी श्वेता हिस्सा है। प्रदेश भर में अपराध पीड़िताओं को दिए जाने वाले मुआवजे भी उनके स्तर से जारी होता है। 2008 में पुलिस सेवा में आई श्रीमती भट्ट ने थानों में महिला उत्पीड़न के मामलों में बखूबी काम किया है।

विम्मी सचदेवा वर्ष 2003 बैच की आईपीएस अफसर हैं। वह पहली महिला आईपीएस अफसर हैं जो गृह विभाग के अलावा दूसरे विभाग में अपर सचिव बनी हैं, साथ ही बाल विकास निदेशालय की पहली महिला आईपीएस निदेशक हैं। लड़कियों के छेड़छाड़ के मामलों को रोकने के लिए उन्होंने ‘शौर्या एप’ वर्ष 2014 में नैनीताल में लॉंच किया था। उस वक्त वह नैनीताल की एसपी रही हैं।

इसके बाद ‘शौर्या एप’ ऊधम सिंह नगर, चमोली, पौड़ी समेत दूसरे जिलों में लॉंच किया गया। बाद में केंद्र सरकार ने इसे स्वीकृत किया। स्कूल कालेजों में छेड़छाड़ की घटनाएं रोकने के लिए और लड़कियों को जागरुक करने के लिए विम्मी सचदेवा ने स्कूलों में शिविर श्रंखला शुरू की।

इन कैंपों में लड़कियों को बचाव के तरीके बताए गए और उन्हें जानकारी दी गई कि ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए किस अधिकारी को सूचित करें। इसके साथ ही बलात्कार से पीड़ित महिलाओं में फिर से आत्म विश्वास जगाने और उन्हें अवसाद की स्थिति से उबारने के लिए काउंसलिंग सेल का गठन किया। इस वक्त वह अपर सचिव मुख्यमंत्री, महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास, चिकित्सा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और निदेशक आईसीडीएस हैं।
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