नेरुल के रामलीला मैदान में चल रहे कौथिग-2020 की छठी शाम की शुरुआत उत्तराखंड के खटीमा से दल नायक बंटी राणा के नेतृत्व में आए थारू सांस्कृतिक विकास समिति के लोक कलाकारों की प्रस्तुति से हुई। गायक हरीश और गायिका उर्मिला मेहता ने दैणा होइया खोली का गणेशा....की वंदना से कार्यक्रम की शुरुआत की।
खटीमा के दल ने थारू होली की नृत्य नाटिका प्रस्तुत कर प्रवासियों को थारू संस्कृति के रंगों में सराबोर कर दिया। मंच पर विशन हरियाला ने कुमाउनी गीतों का ऐसा समा बांधा की हर कोई झूमने पर मजबूर हो गया। इसके बाद दर्शन फर्सवाण ने लोक संस्कृति में डूबे कई गीतों से श्रोताओं का मनोरंजन किया। मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित हुए महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी भी उत्तराखंडी संस्कृति के रंगों में रंगे कार्यक्रमों को देखकर गदगद नजर आए।
लोक गायक दर्शन फर्सवाण ने ‘दादू गैरिया की ज्योंला हुड़की घमा घम’ पेश किया तो हर कोई थिरकने पर मजबूर हो गया। गायक हरियाला ने ‘जय जय बद्रीनाथ, जय काशी केदार’ की वंदना की। लोग गीतों के बीच नृत्य प्रस्तुतियों ने भी दर्शकों का मन मोहा। घुघूती न बासा, आम की डालियों में घुघूती न बासा जैसे गीत जब मंच पर प्रस्तुत हुए तो अपने गांव-गलियों को याद कर प्रवासियों की आंखें नम हो आईं। जौनसार के नन्हे कलाकार रोहित शर्मा ने भोले बाबा कैलाश...का भजन की प्रस्तुति दी। मुंबई की नन्ही कलाकार पूजा ने उत्तराखंड की स्वर कोकिला मीना राणा का लोकप्रिय गीत हो साईबा... हो मन मेरू लगिगी कुमाऊं गढ़ म.... प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया।
जौनसार के लोक कलाकारों ने समृद्ध संस्कृति का परिचय कराते हुए गीत-नृत्य का ऐसा समा बांधा की हर किसी के कदम थिरक उठे। प्रकाश चंद के बेहतर मंच संचालन में जौनसार के लोक कलाकारों ने भी एक से बढ़कर एक कार्यक्रम पेश किए। मंच पर राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी के साथ विधायक मंदाताई महात्रे, उद्योगपति माधवानंद भट्ट, गिरवीर नेगी, नरेंद्र जोशी, चामू सिंह राणा, सुरेश राणा, जगदीश सामंत, महेश राजपूत, मोहन काला, देहरादून से आए पत्रकार अरुण शर्मा, राजेंद्र जोशी, नगर सेवक बहादुर बिष्ट, डॉ. योगेश्वर शर्मा, अभिनेता सुधीर पांडे, नगर सेवक सूरज पाटिल, गिरीश महात्रे, प्रदीप कुमार, दिनेश चमोली, अशोक मुरारी, रतन सिंह वर्तवाल आदि मौजूद थे। अतिथियों का स्वागत कौथिग फाउंडेशन के अध्यक्ष हीरासिंह भाकुनी, संयोजक केशरसिंह बिष्ट, कार्याध्यक्ष सुशील कुमार जोशी, महासचिव तरुण चौहान, मनोज भट्ट, सुरेश काला, सुरेंद्र बिष्ट, प्रकाश चंद, बलवंत पवार, मोहन बिष्ट, गोविंद आर्य ने किया।
परिश्रम और सादगी के लिए जाना जाता है पहाड़ी समाज : कोश्यारी
कौथिग महाकुंभ में मुख्य अथिति के रूप में पहुंचे महाराष्ट्र के राज्यपाल भगत सिंह कोश्यारी ने कहा कि आज पहाड़ी समाज को हर क्षेत्र में सम्मान की नजरों से देखा जाता है तो उसके पीछे लंबा संघर्ष, परिश्रम और सादगी है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड के लोगों ने 60-70 साल पहले जब महाराष्ट्र का रुख किया था तब वे होटलों में बर्तन धोने और खाना बनाने तक सीमित थे। आज वक्त बदल गया है। आज शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र हो जहां उत्तराखंड के लोग आपको न मिलते हों। भगत दा ने कहा कि कौथिग के इस मंच पर आज मैं खुद महाराष्ट्र के राज्यपाल के रूप में खड़ा हूं तो ये इस बात का घोतक है कि हम तरक्की कर रहे हैं।
कौथिग प्रांगण में उत्तराखंडी प्रवासियों के भीड़ देखकर भगत दा भी पूरी ‘रो’ में नजर आए। उन्होंने उत्तराखंड के खान-पान और बोली भाषा के कई शब्दों को महाराष्ट्र से जोड़ा तो महाराष्ट्र की प्रगति में उत्तराखंड़ियों के योगदान को भी सराहा। उन्होंने प्रवासियों से आह्वान किया कि वे अपनी बोली-भाषा, संस्कृति और संस्कारों को न भूलें। क्योंकि जो समाज बोली भाषा और संस्कृति से दूर हो जाता है, उसका पतन उसी दिन शुरू हो जाता है। बकौल भगत दा, अपनी बोली भाषा, अपने खान पान और संस्कृति से बच्चों को जरूर रूबरू कराएं। पीढ़ियों के मध्य ये अंतर नहीं आना चाहिए कि माता-पिता तो पहाड़ के हैं और हम मुंबईवासी।