सप्लाई प्वाइंट बनाने में 33.57 लाख का घोटाला
आरोप है कि तत्कालीन कमांडेंट बोरकर ने सप्लाई प्वाइंट को बटालियन मुख्यालय से चार किलोमीटर पहले बना दिया। जबकि, इसकी कोई जरूरत ही नहीं थी। यही नहीं इसके लिए न तो आईटीबीपी मुख्यालय से अनुमति ली गई और न ही किसी को बताया गया। इस तरह यहां से जब दुलाई हुई तो इसका अधिक भुगतान करना पड़ा। आईटीबीपी की जांच में इस तरह भी 33.57 लाख रुपये का घोटाला हुआ। इस प्वाइंट को पीछे हटाने का उन्होंने कोई कारण भी नहीं बताया। यही नहीं जो ढुलाई प्राइवेट वाहनों और खच्चरों-टट्टुओं के माध्यम से होनी थी, वह पोर्टरों के माध्यम से कराई गई। इसमें भी 47 लाख रुपये का भुगतान फर्जी तरीके से मदन सिंह राणा की फर्म को किया गया। चालान और किराये के दस्तावेज में भी फर्जीवाड़ा कर 31 लाख रुपये का घोटाला किया गया।
पोर्टर थे या शक्तिमान जो ले गए 800 किलो का जनरेटर
हेराफेरी करने वाले अधिकारियों ने वहां की भौगोलिक स्थिति का भी ध्यान नहीं किया। आईटीबीपी की विभिन्न पोस्ट पर 12 जनरेटर को पहुंचाना था। ये पोस्ट मुख्यालय से बेहद ऊंचाई वाले स्थानों पर थीं। इनमें से 10 जनरेटर का वजन प्रत्येक का करीब 800 किलोग्राम और दो जनरेटर का, जिनमें प्रत्येक का वजन करीब सात क्विंटल था। इतने भारी जनरेटर को पहुंचाने के लिए पोर्टरों का भुगतान दर्शाया गया। कुल भुगतान 11 लाख से भी ज्यादा का हुआ। जबकि, यह संभव ही नहीं है कि कोई व्यक्ति या चार-पांच व्यक्ति एक साथ मिलकर भी इस तरह ऊंचाई वाले स्थानों पर इन जनरेटर को पहुंचा सकें।
8000 लीटर केरोसिन भेजने में किया घोटाला
2017 से 2019 के बीच मिर्धा में तैनात रहे कमांडेंट महेंद्र प्रताप ने आठ हजार लीटर केरोसिन को इधर से उधर ले जाने में ही लाखों रुपये का घोटाला किया। 2018 में महेंद्र प्रताप ने एसएसबी डीडीहाट से 8000 लीटर केरोसिन उधार लेने के लिए अनुमति दी थी। इसके लिए डीडीहाट से यह केरोसिन फर्जी तरीके से मिर्थी में लाना दर्शाया गया। इसमें छह लाख रुपये से ज्यादा का घोटाला किया गया। इसके बाद इस केरोसिन में से चार हजार लीटर एसएसबी डीडीहाट को लौटाना भी दर्शाया गया। इसके किराये में भी लगभग पांच लाख रुपये का घोटाला किया गया।