फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

उत्तराखंड: अधिकारी का आरोप, फर्जी हस्ताक्षर कर मेट्रो हॉस्पिटल को भेजा नोटिस, सूचना आयोग ने जांच के लिए भेजा

Mon, 02 Nov 2026 01:46 PM IST
Renu Saklani अमर उजाला ब्यूरो, देहरादून

सार

रकारी विभाग की कार्रवाई में कथित फर्जी हस्ताक्षरों का मामला सामने आने से श्रम विभाग में हलचल है। मेट्रो हॉस्पिटल से लाखों रुपये की कर वसूली के लिए जारी नोटिस पर अब सवाल उठे हैं। सूचना आयोग ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं।
विज्ञापन
उत्तराखंड सूचना आयोग - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

उत्तराखंड सूचना आयोग ने एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा है कि असली विषय सूचना पाना नहीं है। आरटीआई का असली उद्देश्य श्रम विभाग में हुई उस अनियमितता को सामने लाना है जिसमें कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षर कर एक संस्थान को नोटिस जारी किया गया है। आयोग ने मामले की जांच के लिए अपने आदेश की प्रति श्रम विभाग के उच्च अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया है।

दरअसल, सुरेश चंद्र आर्य ने श्रम विभाग के एक कार्यालय में आरटीआई दाखिल कर उन दस्तावेजों की मांग की थी जिन पर उनके कथित फर्जी हस्ताक्षर कर मेट्रो हॉस्पिटल एवं हार्ट इंस्टीट्यूट सिडकुल से कर बकाए की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों से यह स्पष्ट हुआ है कि अधिकारी के हस्ताक्षर पर जारी नोटिस पर अस्पताल से 21,85,251 रुपये का कर प्राप्त किया जा चुका है।

विज्ञापन


सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की
अस्पताल पर अब भी 9,88,970 रुपये का कर बकाया होने की बात कही गई है जिसकी वसूली के लिए विभागीय कार्रवाई चल रही है। वहीं, अधिकारी द्वारा आयोग के सामने उपलब्ध कराए गए दस्तावेजों और तर्कों से स्पष्ट हुआ है कि उक्त नोटिस पर अंकित हस्ताक्षर उनके नहीं हैं। विभाग से आरटीआई में सही सूचना न मिलने पर उन्होंने पहले विभागीय अपील दायर की थी। विभागीय आदेश के बाद भी उचित जवाब न मिलने पर उन्होंने सूचना आयोग में द्वितीय अपील दायर की थी।

ये भी पढे़ं...देवप्रयाग: विधायक विनोद कंडारी का वाहन दुर्घटनाग्रस्त, बदरीनाथ हाईवे पर दूसरे वाहन ने मारी टक्कर, बाल-बाल बचे

आयुक्त दलीप सिंह आर्य ने सुनवाई करते हुए कहा कि यह स्पष्ट है कि मामला सूचना पाने का नहीं, बल्कि विभागीय अनिमितता को सामने लाने का है। उन्होंने सुरेश चंद्र आर्य को उपयुक्त जांच विकल्प पाने की सलाह देते हुए आदेश की प्रति उच्च अधिकारियों को भेजने का निर्देश दिया जिससे मामले का सच सामने आ सके।

विज्ञापन

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें