जमीन से करीब तीन फुट ऊपर झूलने वाले इन तारों में हाथी उलझते हैं तो तुरंत निकल आते हैं और फिर दूर चले जाते हैं। परंपरागत सोलर फेंसिंग में हाथी कई बार पार पाने की कोशिश में तारबाड़ को नुकसान पहुंचाते हैं। जमीन और तारों के बीच में तीन फुट का अंतर रहने से छोटे जानवर आसानी से पार कर जाते हैं। वन अधिकारियों के मुताबिक यह तरीका कारगर साबित हुआ है।
छह माह में ही आए परिणाम
वन अधिकारी इस प्रयोग पर निगाह रखे हुए हैं। अधिकारियों के मुताबिक इससे अभी तक इस गांव से हाथियों को दूर रखने में मदद मिली है। गांव के लोगों ने इस बार फसल भी लगाई है।
बांदीपुर टाइगर रिजर्व से मिला विचार
कर्नाटक के बांदीपुर टाइगर रिजर्व में इसी तरह का प्रयोग किया गया है। कुंदन कुमार के मुताबिक यह विचार उन्हें वहीं से मिला। 2017-18 में वहां यह तारबाड़ तीन किलोमीटर तक प्रयोग की गई थी। प्रयोग सफल रहा तो अब 20 किलोमीटर में यह बाड़ की गई है। कुंदन कुमार को अब ट्वीटर पर भी इस प्रयोग के लिए बधाई मिल रही है।