सोमवार को जब आईएएस अधिकारी बच्चों की क्लास लेने स्कूलों में पहुंचे तो वहां बच्चों ने कुछ ऐसा कर दिया कि शिक्षक और अधिकारी दोनों सकते में आ गए।
आईएएस अफसरों के निरीक्षण के मद्देनजर एक दिन के लिए ही सही स्कूलों में व्यवस्थाएं पटरी पर रहीं। जिन स्कूलों में अधिकारी गए वहां खूब साफ-सफाई की गई, लेकिन पढ़ाई की पोल-पट्टी खुल गई।
सरकारी स्कूलों में बच्चों की पढ़ाई कैसे करवाई जा रही है? यह हकीकत एक-सवा घंटे में अफसरों के सामने आ गई। टाट-पट्टी पर बैठकर पढ़ रहे नौनिहालों को सीखने की संप्राप्ति (लर्निंग आउट कम) का पता नहीं है। ग्रामीण इलाकों के स्कूलों की हालत अधिक खराब है।
शासन के अपर मुख्य सचिव, सचिव और अपर सचिव स्तर के अधिकारियों ने अलग-अलग स्कूलों में जाकर स्थिति देखी। विभिन्न कक्षाओं में लर्निंग आउट कम का पता नहीं है। बच्चों से अधिकारियों ने जब सवाल पूछे तो वे बता नहीं पाए।
खासतौर पर हाई स्कूल स्तर की कक्षाओं की स्थिति अधिक खराब मिली है। छोटे-छोटे फार्मूले जो कक्षा छह में पढ़ाए जाते हैं, उन्हें हाई स्कूल के बच्चे नहीं बताए। ग्रामीण इलाकों में यह स्थिति और अधिक खराब है। जिन मॉडल स्कूलों से अपेक्षा की गई थी कि वे इंग्लिश मीडियम स्कूलों को टक्कर देंगे, वे सामान्य स्कूलों से भी गए गुजरे निकले।
प्राथमिक विद्यालय जाखन और जीआईसी किशनपुर में अपर मुख्य सचिव डॉ. रणवीर सिंह निरीक्षण के लिए गए थे। जीआईसी किशनपुर को मॉडल स्कूल बनाया गया है। कंप्यूटर लैब से लेकर यहां सारी सुविधाएं हैं, लेकिन बच्चे पढ़ाई में कमजोर हैं। यहां शिक्षण कार्य में लापरवाही पाई गई।
शहरी क्षेत्रों के स्कूलों में तो बच्चों ने अफसरों से सवाल पूछे, लेकिन शहर की सीमावर्ती स्कूल जो ग्रामीण क्षेत्र में आते हैं, वहां के बच्चों की कैरियर को लेकर कोई सोच ही विकसित नहीं की गई। अधिकारियों का कहना है कि लगता है कि बच्चों को भावनाओं की अभिव्यक्ति के लिए प्रेरित ही नहीं किया जाता है।
सचिव और अपर सचिवों ने जब विज्ञान, गणित और दूसरे विषयों के बारे में बातचीत के दौरान पूछा तो कुछ जवाब नहीं दे पाए। उनका कहना है कि शिक्षक ढंग से नहीं पढ़ा रहे हैं। इस संबंध में वे शासन को ब्रीफ करेंगे।
कैसे बने आईएएस, किया बेटियों ने सवाल
परिवहन सचिव डी. सेंथिल पांडियन ने कारगी चौक स्थित बालिका इंटर कालेज का निरीक्षण किया। इस दौरान छात्राओं ने सचिव से कैसे आईएएस, आईपीएस बन सकते हैं? उसके बारे में पूछा। सचिव ने आत्मविश्वास और अनुशासन को सफलता का गुरुमंत्र बताया और कहा कि इनके दम पर कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। बस सपने देखना और उसे पूरा करने की जिद नहीं छोड़नी चाहिए। पांडियन ने विद्यालय की व्यवस्थाओं पर संतोष जताया।
मैडम, कंप्यूटर साइंस विषय है नहीं, कैसे बनेंगे साफ्टवेयर इंजीनियर
प्रमुख सचिव मनीषा पंवार ने राजकीय इंटर कॉलेज पौंधा में विद्यार्थियों की समस्याओं को सुनने के साथ उन्हें करियर में कामयाबी का पाठ पढ़ाया। विद्यालय परिसर में सफाई व्यवस्था सही न होने से प्रमुख सचिव ने शिक्षकों को स्वच्छता बनाने के निर्देश दिए। स्कूली बच्चों से रू-ब-रू होते हुए उन्होंने बुनियादी स्तर से ही कठिन परिश्रम व मेहनत से पढ़ाई करने का मंत्र दिया।
इस दौरान बच्चों ने स्कूल में पीने के पानी, टॉयलेट, लैब की समस्या को रखा। बच्चों ने मनीषा पंवार से सवाल किया कि स्कूल में कंप्यूटर साइंस विषय नहीं है। ऐसे में साफ्टवेयर इंजीनियर कैसे बनेंगे। प्रमुख सचिव ने बच्चों से पूछा कि आप क्या बनना चाहते हैं, तो छात्र-छात्राओं ने भारतीय सेना, डॉक्टर व पुलिस अफसर बनने में रुचि दिखाई।
एक छात्रा ने सवाल पूछा कि मैडम आपकी सफलता का राज क्या है और स्कूल टाइम में किस तरह से पढ़ाई की? इसके जवाब में मनीषा पंवार ने कहा कि कठिन परिश्रम से ही सफलता मिलती है और काफी हद तक कामयाबी में भाग्य भी साथ होता है।
आईआईटी में एडमिशन के लिए क्या करें
सचिव सौजन्या ने कौलागढ़ स्थित प्राथमिक विद्यालय और जीआईसी का निरीक्षण किया। इस दौरान बच्चों ने उनसे इंजीनियरिंग, मेडिकल और आईआईटी में प्रवेश पाने के तरीके पूछे। कुछ छात्रों ने उनसे प्रशासनिक सेवा की परीक्षा की तैयारी के संबंध में जानकारी ली। इसके साथ ही स्कूली बच्चों ने कोचिंग के संबंध में भी जानकारी ली कि प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए कहां कोचिंग करें। उन्होंने बताया कि स्कूलों के निरीक्षण के दौरान मध्यान्ह भोजन को भी देखा कि इसमें पौष्टिक तत्वों की कमी तो नहीं है। बच्चों के साथ मध्यान्ह भोजन भी किया।