मौण मेले में सात पट्टियों के लोगों की मुख्य भूमिका है। प्रत्येक साल एक ही पट्टी के लोगों को मौण तैयार करने की जिम्मेदारी दी जाती है। इस वर्ष नदी में मौण डालने की जिम्मेदारी छज्यूला पट्टी के बंग्लों की कांडी, सैंजी, कांडीखाल, भटोली, चम्या, बनोगी, गांवखेत, भेडियान, घंडियाला, सरतली, कसोन, कांडा, रणोगी, तिमलियाल, पाली कुणा गांव की थी। मौण मेले के लिए गांव के प्रति परिवारों द्वारा टिमरु का पाउडर तैयार करना होता है।
मौण मेले का त्योहार आपसी भाईचारे व क्षेत्र की एकता का प्रतीक माना जाता है। कई दशकों से बिना सुरक्षा व्यवस्था के मौण मेला संचालित होता आ रहा है। इस मौके पर गोपाल, सिया लाल, राजेंद्र, महिपाल राणा, सिकेंद्र रौछला, जयेंद्र सिंह, लुदर भंडारी, विरेंद्र वर्मा, विजय सिंह, दिपाल सिंह, नीरज रावत आदि मौजूद थे।