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उत्तराखंड: वीकेंड पर पर्यटन स्थलों पर बढ़ रही भीड़ पर हाईकोर्ट ने जताई चिंता, कहा- कर्फ्यू में छूट पर दोबारा विचार करे सरकार

Wed, 07 Jul 2021 09:53 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल

सार

कोरोना काल में प्रदेश की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के मामले में दायर दस विभिन्न जनहित याचिकाओं पर बुधवार को मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान और न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ में सुनवाई हुई।
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नैनीताल हाईकोर्ट - फोटो : फाइल फोटो
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विस्तार
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कोरोना कर्फ्यू में ढील दिए जाने के साथ ही नैनीताल, मसूरी जैसे पर्यटन स्थलों पर उमड़ रही भारी भीड़ पर हाईकोर्ट ने चिंता जताई है। अदालत ने कहा कि प्रदेश के पर्यटन स्थलों में उमड़ रहे सैलानी कोविड नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। सरकार की ओर से की गईं व्यवस्थाएं धराशायी हो गई हैं। अदालत ने इन सबके मद्देनजर सरकार को निर्देश दिए हैं कि वह सप्ताहांत में पर्यटकों के लिए कोरोना कर्फ्यू में दी गई छूट पर पुनर्विचार करे और इस बारे में लिए गए फैसले से अवगत कराए। 

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अदालत ने राज्य सरकार को 28 जुलाई तक विस्तृत शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए। सुनवाई में नवनियुक्त मुख्य सचिव डॉ. सुखबीर सिंह संधू, स्वास्थ्य सचिव अमित नेगी, पर्यटन सचिव दलीप जावलकर, एडिशनल सचिव डॉ. आशीष चौहान वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। अदालत ने सरकार को सप्ताहांत में पर्यटकों के लिए दी गई छूट पर पुनर्विचार करने के निर्देश देने के साथ ही डेल्टा प्लस वैरिएंट के नमूनों की जांच रिपोर्ट का विवरण भी तलब किया। यह बताने को कहा कि जहां से नमूने लिए गए हैं उन जिलों के अधिकारियों ने सावधानी के लिए क्या कदम उठाए हैं, राज्य के कितने सरकारी व कितने निजी अस्पतालों में एमआरआई है और कितनों में नहीं है। 

इसके अलावा हाईकोर्ट ने यह रिपोर्ट देने के लिए भी कहा कि राज्य में कितने पेडियाट्रिक (बाल रोग) वार्ड व बेड हैं, कितने सीएचसी में डॉक्टर उपलब्ध हैं और कहां नहीं हैं। कोर्ट ने राज्य में प्रतिदिन हो रहे टीकाकरण, पहली डोज लगा चुके लोगों की संख्या और प्रतिदिन की दर, बुजुर्ग व्यक्तियों और विकलांगों को लगाई गई वैक्सीन की संख्या तथा इनके लिए की गई व्यवस्था भी बताने को कहा। कोर्ट ने पूछा कि क्या घर के नजदीक वैक्सीनेशन क्लीनिक के बारे में सरकार ने कोई विचार किया है। 
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याचिकाकर्ता अनु पंत और रवींद्र जुगरान की ओर से कोर्ट को बताया गया कि राजकीय मेडिकल कॉलेज में इन्टर्न डॉक्टर/ जूनियर रेजिडेंट डॉक्टर का मानदेय केवल सात हजार पांच सौ रुपये है, जबकि हिमाचल प्रदेश में यह 17 हजार, छत्तीसगढ़ में लगभग 18 हजार है। कोर्ट ने कहा कि राज्य सरकार इसे बढ़ाने पर विचार करे। कोर्ट ने कहा है कि सरकार 28 जुलाई तक यह रिपोर्ट पेश करे और मुख्य सचिव साप्ताहांत पर्यटन के बारे में लिए गए निर्णय के संबंध में कोर्ट को अवगत कराएं। याचिकाकर्ता ने कहा कि तीसरी लहर का बच्चों पर ज्यादा असर पड़ने की आशंका है और यहां पर पेडियाट्रिक वार्ड और वेंटिलेटर की कमी है। सरकार को निर्देशित किया जाए कि वह बच्चों के लिए जरूरी स्वास्थ्य ढांचा खड़ा करे। 

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महाभारत काल में होती थी लाइव स्ट्रीमिंग पर प्रतिबंध का कहीं जिक्र नहीं

हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एक बार फिर सरकार की किरकिरी हो गई। सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र में कहा गया कि कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन कर दिया गया है और चार धाम यात्रा पर रोक लगा दी गई है। यह भी कहा गया कि पूजा के लाइव प्रसारण के लिए चार धाम बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया है। मुख्यमंत्री बदल जाने के कारण बोर्ड की बैठक नहीं हो पाई, क्योंकि बोर्ड अध्यक्ष मुख्यमंत्री ही होते हैं। सरकार ने यह भी दोहराया कि शास्त्र सम्मत न होने के कारण लोग इसके विरोध में हैं।

इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक ओर आप कह रहे हो कि मीटिंग में तय होगा फिर यह भी कहते हो कि शास्त्र सम्मत नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मैंने भी शास्त्र पढ़े हैं बताएं कि किस शास्त्र के कौन से श्लोक में यह प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि महाभारत में तो संजय द्वारा लाइव प्रसारण का उल्लेख है, यानी तब यह व्यवस्था थी। ऐसे में यदि कोई प्रतिबंध होता तो उसका भी उल्लेख होता। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अब जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है इस पर सरकारी पक्ष चर्चा कर ही क्यों रहा है।

डेल्टा वैरिएंट हो रहा भयावह
हाईकोर्ट के समक्ष सरकार की ओर से दी गई जानकारी में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की भयावह होती स्थिति नजर आई। कोर्ट को बताया गया कि अब तक इस वैरिएंट की जांच के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल, दिल्ली (एनसीडीसी) को 521 नमूने भेजे गए हैं जिनमें 144  मामलों में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर में एक मामले में डेल्टा प्लस की भी पुष्टि हुई है। इस हिसाब से कुल भेजे गए मामलों में 27 प्रतिशत में डेल्टा वैरिएंट पाया गया है।

अमर उजाला की खबर का लिया संज्ञान
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 27 जून को अमर उजाला में प्रकाशित प्रदेश में एमआरआई मशीनों और अन्य सुविधाओं संबंधी पड़ताल (उपकरणों का टोटा, सरकारी स्वास्थ्य सेवा की तबीयत नासाज) का भी संज्ञान लिया। कोर्ट ने एमआरआई मशीनों के संबंध में भी सरकार से जानकारी मांगी है।
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