हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान एक बार फिर सरकार की किरकिरी हो गई। सरकार की ओर से दाखिल शपथपत्र में कहा गया कि कोर्ट के पूर्व आदेश का पालन कर दिया गया है और चार धाम यात्रा पर रोक लगा दी गई है। यह भी कहा गया कि पूजा के लाइव प्रसारण के लिए चार धाम बोर्ड को प्रस्ताव भेजा गया है। मुख्यमंत्री बदल जाने के कारण बोर्ड की बैठक नहीं हो पाई, क्योंकि बोर्ड अध्यक्ष मुख्यमंत्री ही होते हैं। सरकार ने यह भी दोहराया कि शास्त्र सम्मत न होने के कारण लोग इसके विरोध में हैं।
इस पर मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि एक ओर आप कह रहे हो कि मीटिंग में तय होगा फिर यह भी कहते हो कि शास्त्र सम्मत नहीं है। मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि मैंने भी शास्त्र पढ़े हैं बताएं कि किस शास्त्र के कौन से श्लोक में यह प्रतिबंध लगाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि महाभारत में तो संजय द्वारा लाइव प्रसारण का उल्लेख है, यानी तब यह व्यवस्था थी। ऐसे में यदि कोई प्रतिबंध होता तो उसका भी उल्लेख होता। मुख्य न्यायाधीश ने यह भी कहा कि अब जब मामला सुप्रीम कोर्ट में है इस पर सरकारी पक्ष चर्चा कर ही क्यों रहा है।
डेल्टा वैरिएंट हो रहा भयावह
हाईकोर्ट के समक्ष सरकार की ओर से दी गई जानकारी में कोरोना के डेल्टा वैरिएंट की भयावह होती स्थिति नजर आई। कोर्ट को बताया गया कि अब तक इस वैरिएंट की जांच के लिए नेशनल सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल, दिल्ली (एनसीडीसी) को 521 नमूने भेजे गए हैं जिनमें 144 मामलों में डेल्टा वैरिएंट की पुष्टि हुई है। इसके अलावा ऊधमसिंह नगर में एक मामले में डेल्टा प्लस की भी पुष्टि हुई है। इस हिसाब से कुल भेजे गए मामलों में 27 प्रतिशत में डेल्टा वैरिएंट पाया गया है।
अमर उजाला की खबर का लिया संज्ञान
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान 27 जून को अमर उजाला में प्रकाशित प्रदेश में एमआरआई मशीनों और अन्य सुविधाओं संबंधी पड़ताल (उपकरणों का टोटा, सरकारी स्वास्थ्य सेवा की तबीयत नासाज) का भी संज्ञान लिया। कोर्ट ने एमआरआई मशीनों के संबंध में भी सरकार से जानकारी मांगी है।