याचिका में कहा कि सरकार द्वारा एक्ट में किए गए बदलाव को बैक डेट से लागू कराया जा रहा है। याचिकाकर्ता का कहना था कि इस अधिनियम को लागू करने से पूर्व 300 दिन का समय दिया जाना चहिए था, लेकिन राज्य सरकार की ओर से इसे बैक डेट से लागू किया गया है।
याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार के दो बच्चों से अधिक के चुनाव लड़ने वाले बदलाव के बाद पहाड़ी क्षेत्रों में प्रधान के उम्मीदवार मिलना मुश्किल हो जाएगा। याचिका में हाई स्कूल पास होने की बाध्यता को भी चुनौती दी गई है।
अधिनियम के संशोधन में यह भी कहा गया है कि कोऑपरेटिव सोसायटी के सदस्य भी दो से अधिक बच्चे होने के कारण चुनाव नहीं लड़ सकते हैं, लेकिन गांवों में प्रत्येक सदस्य किसी न किसी कोऑपरेटिव सोसायटी का सदस्य होता है इस तरह से तो ग्राम प्रधान मिलना मुश्किल हो जाएगा। इस मामले में सुनवाई जारी है।