इसकी पुनर्विचार याचिका खारिज हो गई है और सर्वोच्च न्यायालय में भी कोई अपील दायर नहीं की गई है। ऐसे में राज्य सरकार एक्ट लाने के लिए बाध्य है। आईएमए एक सप्ताह के अंदर पंजीकृत क्लीनिकों की रिपोर्ट कोर्ट में पेश करे ताकि हड़ताल पर रहने वालों के खिलाफ कार्यवाही की जा सके।
खंडपीठ ने कहा कि मरीजों को कोई परेशानी न हो हो, इसके लिए हर संभव स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। क्लीनिकल एस्टेब्लिशमेंट एक्ट के खिलाफ 15 फरवरी से निजी डाक्टर एवं अस्पताल हड़ताल पर हैं।
इसके खिलाफ गुरविंदर ने मंगलवार को हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याची का कहना था कि निजी डाक्टरों की हड़ताल से लोग परेशान हो रहे हैं। वे सरकारी अस्पतालों की ओर रुख कर रहे हैं। सरकारी स्वास्थ्य सेवा नाकाफी है। राज्य सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था करने का निर्देश दिया जाए।