एनआईटी उत्तराखंड को केंद्र सरकार ने 2009 में स्वीकृति दी थी। 2010 में यहां प्रवेश शुरू हुए और इस समय यहां नौ सौ से अधिक छात्र हैं। नौ साल बाद भी इस संस्थान के पास अपनी भूमि नहीं है और श्रीनगर में एनएच 58 के किनारे के एक प्लॉट में यह संचालित किया जा रहा है। कुछ समय पहले ही अव्यवस्था को लेकर छात्र बेमियादी हड़ताल पर चले गए थे। इसके बाद यहां के कुछ छात्रों को जयपुर एनआईटी में भी शिफ्ट किया गया।
एनआईटी परिसर के लिए 120 हेक्टेयर जमीन दान दी है गांववालों ने
देश सरकार ने पूर्व में सुमाड़ी, नियाल गांव में एनआइटी के लिए जमीन चिह्नित की थी। इस गांव के लोगों ने भी कोर्ट में प्रार्थना पत्र दाखिल कर पक्षकार बनाने की मांग की हुई है। सुमाड़ी में चिह्नित जमीन की बाउंड्री वॉल चार करोड़ की लागत से कराई गई लेकिन इस जमीन को संस्थान के लिए अनुपयुक्त करार दिया गया। अब गांव के लोगों का आरोप है कि संस्थान को मैदानी क्षेत्र में शिफ्ट करने की कोशिश की जा रही है। एनआईटी परिसर के लिए 120 हेक्टेयर जमीन दान गांव वालों ने दान दी है।