हाईकोर्ट ने आयुष्मान योजना में घोटाले के मामले में सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं। उधर, सरकार ने कोर्ट में बताया कि आरोपित अस्पतालों को आयुष्मान योजना की सूची से हटा दिया गया है और आरोपी डॉक्टरों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने बुधवार को काशीपुर निवासी मुन्नी देवी की याचिका पर सुनवाई की। पूर्व में कोर्ट ने इस मामले में सरकार को स्थिति स्पष्ट करने को कहा था।
याची का आरोप था कि काशीपुर के सरकारी अस्पताल की बजाय लोगों को कैलाखेड़ा के प्राथमिक अस्पताल से पर्ची बनाकर पंजीकृत प्राइवेट अस्पतालों के लिए रेफर किए जा रहा है। इस प्राथमिक अस्पताल ने मई और जून माह में 47 लोगों को रेफर किया। पर्ची में न तो बिमारी का नाम है और न ही बीमार के घर का पता है, ना ही उसमें उम्र दर्ज की गई है और मरीज के पिता, डॉक्टर का नाम भी नहीं है। इस प्राथमिक अस्पताल में पिछले छह माह से डॉक्टर ही नहीं हैं।
योजना में पांच लाख तक का इलाज किया जा सकता है। याचिकाकर्ता के मुताबिक जब काशीपुर में सरकारी अस्पताल है तो मरीजों को रेफर क्यों किया जा रहा है। इससे अधिकारियों और पंजीकृत अस्पताल संचालकों की मिलीभगत की आशंका है। इसकी जांच की जाय।