केंद्र से बजट जारी न होने के कारण महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) की देनदारी सौ करोड़ तक पहुंच गई है। बजट न होने से निर्माण सामग्री और मजदूरी का भुगतान लटका हुआ है। इस कारण पंचायतों में चल रहे विकास कार्यों की रफ्तार थम गई है। पंचायत प्रतिनिधि किसी तरह से उधार में निर्माण सामग्री का प्रबंध कर रहे हैं। प्रदेश में मनरेगा निर्माण सामग्री का बकाया भुगतान 76 करोड़ तक हो गया है। प्रदेश सरकार को उम्मीद है कि केंद्रीय बजट पेश होने के बाद मनरेगा का बजट जारी हो जाएगा।
लोकसभा चुनाव की आचार संहिता और केंद्र का आम बजट पेश न होने से मनरेगा योजना का भुगतान लटका हुआ है। इससे प्रदेश में मनरेगा की देनदारी करीब 100 करोड़ तक हो गई है। इसमें सबसे ज्यादा बकाया निर्माण सामग्री का है। चालू वित्तीय वर्ष 2019-20 में अब तक देनदारी 17 करोड़ है। बाकी देनदारी वर्ष 2018-19 की है। भुगतान न होने से विक्रेताओं ने उधार में सीमेंट, सरिया, रेत, बजरी व अन्य सामग्री देने से हाथ खड़े कर दिए हैं।
इस कारण पंचायतों में चल रहे विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। पंचायत प्रतिनिधि भी भुगतान को लेकर ब्लाक और जिला स्तर पर लगातार संपर्क कर रहे हैं। लेकिन वर्तमान में मनरेगा भुगतान के लिए बजट खत्म है। उधर, अपर सचिव ग्राम्य विकास राम विलास यादव का कहना है कि केंद्र से बजट जारी होते ही बकाया भुगतान किया जाएगा। केंद्र का आम बजट पेश होने के बाद मनरेगा योजना के लिए जल्द धनराशि जारी होने की उम्मीद है।
पिछले वर्ष मनरेगा में हुए 635 करोड़ के काम
उत्तराखंड में वर्ष 2018-19 में मनरेगा योजना में 635 करोड़ की राशि खर्च की गई। इसमें पंचायतों में विभिन्न विकास कार्य कराए गए। लेकिन केंद्र से अभी तक पिछले साल का बकाया भुगतान नहीं हुआ है।