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उत्तराखंड: जंगलों में लगी आग पर हाईकोर्ट सख्त, प्रमुख वन संरक्षक को कोर्ट में पेश होने के निर्देश

Tue, 06 Apr 2021 09:37 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल

सार

  • समाचार पत्रों में जंगलों की आग पर छप रहीं खबरों पर लिया स्वत: संज्ञान
  • प्रमुख वन संरक्षक को दिए व्यक्तिगत रूप से आज कोर्ट में पेश होने के निर्देश
  • वनाग्नि से निपटने के लिए सरकार से तलब किया तैयारियां का ब्योरा
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कोर्ट - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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नैनीताल हाईकोर्ट ने समाचार पत्रों में प्रकाशित वनाग्नि की खबरों पर स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रमुख वन संरक्षक को बुधवार को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। हाईकोर्ट ने जंगलों की आग पर नियंत्रण के लिए प्रदेश सरकार से उसकी तैयारियों का ब्योरा भी तलब किया है।

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मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ ने इन द मैटर ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ फॉरेस्ट एरिया, फॉरेस्ट हेल्थ एंड वाइल्ड लाइफ की जनहित याचिका पर स्वत: संज्ञान लिया है। इससे पूर्व हाईकोर्ट के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली तथा राजीव बिष्ट ने कोर्ट को प्रदेश में लगातार जल रहे जंगलों के बारे में अवगत कराया था।

उनका कहना था कि प्रदेश भर के विभिन्न स्थानों पर जंगल आग की चपेट में हैं। प्रदेश सरकार की ओर से इस संबंध में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है, जबकि हाईकोर्ट ने वर्ष 2016 में जंगलों को आग से बचाने के लिए गाइडलाइन जारी की थी।
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इसमें गांव के स्तर से ही आग बुझाने के लिए कमेटियां गठित करने के लिए कहा गया था, जिस पर आज तक अमल नहीं हुआ। हालांकि सरकार आग पर नियंत्रण के लिए हेलिकॉप्टर का उपयोग कर रही है लेकिन इसमें काफी खर्च आ रहा है और इस व्यवस्था से भी आग पर काबू नहीं पाया जा रहा है। इसलिए सरकार को चाहिए कि गांव स्तर पर कमेटियां गठित कर वनाग्नि पर नियंत्रण की पहल करे। 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने यह भी कहा कि कोरोना महामारी के इस दौर में वनाग्नि नुकसानदायक है। धुंध से कोरोना पीड़ितों को सांस लेने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि वनाग्नि नियंत्रण के लिए क्या तैयारियां की गईं हैं। यह भी पूछा कि वनाग्नि से निपटने के लिए क्या उपाय तथा विकल्प सुझाए गए हैं। हाईकोर्ट ने इसकी स्पष्ट रिपोर्ट कोर्ट में पेश करने के लिए कहा है।

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आग बुझाते हुए तीन महिलाओं समेत चार लोग झुलसे

नारायणबगड़/देवाल में कड़ाकोट पट्टी के रैंस गांव के पैंफोरी और भंगोटासारी तोक के जंगल में सोमवार रात को आग भड़क उठी। आग अपनी छानियों की तरफ आता देख ग्रामीण बुझाने दौड़ पड़े और आग बुझाते समय तीन महिलाओं समेत चार लोग बुरी तरह झुलस गए। अन्य ग्रामीणों ने उन्हें पीएचसी नारायणबगड़ में भर्ती कराया। एक महिला की स्थिति गंभीर होने पर उसे हायर सेंटर रेफर कर दिया गया।

ग्रामीण रघुनाथ नेगी एवं सुखदेव भंडारी ने बताया कि भंगोटासारी के चीड़ के जंगल की आग जब रैंस गांव की छानियों और घास तक पहुंचने लगी तो लोग आग बुझाने दौड़ पड़े। आग बुझाने के दौरान माहेश्वरी देवी (42) पत्नी भूपाल सिंह, मानसिंह (60) पुत्र प्रेम सिंह, सुशीला देवी पत्नी शिशुपाल सिंह एवं उर्मिला देवी पत्नी मुकेश सिंह झुलस गए।

सभी लोगों को पीएचसी नारायणबगड़ लाया गया। पीएचसी के डॉ. नवीन चंद्र डिमरी ने बताया कि माहेश्वरी देवी की हालत गंभीर होने पर प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हायर सेंटर रेफर किया गया है, जबकि मान सिंह का अस्पताल में उपचार चल रहा है। ग्राम प्रधान परिपूर्ण रावत ने प्रशासन से जंगल में आग लगाने वाले असामाजिक तत्वों के विरुद्ध कार्रवाई करने की मांग की।

वहीं कई दिनों से देवाल ब्लॉक के जंगल भी जल रहे हैं। मुंदोली, सूया, कोठी, नंदकेशरी, पिनाऊ, देवसारी के जंगल में 30 हेक्टेयर वन संपदा जल गई है। वन विभाग के डिप्टी रेंजर टीएस बिष्ट ने कहा कि ग्रामीणों के सहयोग से आग बुझाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने क्षेत्र के लोगों, प्रशासन व ग्राम प्रहरी से आग लगाने वालों की पहचान करने में सहयोग की अपील की।

वन क्षेत्र में आग लगाने पर तीन के खिलाफ केस

उत्तरकाशी वन प्रभाग ने वन क्षेत्र में आग लगाकर वन संपदा को नुकसान पहुंचाने के दो अलग-अलग मामलों में तीन मुकदमे दर्ज किए गए हैं। इनमें से एक मुकदमा विभागीय कार्रवाई के तहत भारतीय वन अधिनियम से संबंधित धारा में दर्ज किया गया है।

डीएफओ दीपचंद आर्य ने बताया कि मनेरी के विशनपुर सेंज और गंगोरी में वन क्षेत्र में आग लगाने के मामले में पुलिस में अज्ञात के खिलाफ तहरीर दी है। मनेरी के विशनपुर सेंज की घटना पर भी अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया। यहां भूमि वन संरक्षण प्रभाग द्वारा रोपे गए पौधों को जंगल की आग से नुकसान पहुंचा था। डीएफओ ने जारी विज्ञप्ति में कहा कि वनाग्नि के कारण पर्यावरण प्रदूषित हो रहा है। इससे मृदा अपरदन, भूस्खलन बढ़ने के साथ वन एवं वन्य जीवों को भी खतरा उत्पन्न हो गया है। उन्होंने वनों में आग लगाने वाले शरारती तत्वों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी। संवाद
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