शासनादेश में निर्धारित शुल्क 80 हजार को बढ़ाकर 2.15 लाख रुपये वार्षिक कर दिया गया। इस शासनादेश को हिमालया आयुर्वेदिक मेडिकल कालेज, डोईवाला (देहरादून) के ललित तिवारी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर चुनौती दी थी।
याची का कहना था कि सरकार ने खास कालेज को फायदा पहुंचाने के मकसद से शासनादेश जारी किया। फीस निर्धारण अधिनियम 2006 के तहत फीस निर्धारण समिति को ही फीस बढ़ोत्तरी का अधिकार है।
सरकार ने प्रत्याशा में शुल्क बढ़ोत्तरी का शासनादेश जारी किया। 14 अक्तूबर 2015 को शासनादेश जारी हुआ लेकिन कालेजों ने 13 अक्तूबर से पहले ही बढ़ा शुल्क वसूलना शुरू कर दिया। साफ है कालेजों को शुल्क वृद्घि की जानकारी पहले से थी। हाईकोर्ट के इस आदेश से करीब 500 विद्यार्थियों को सीधा लाभ होने का अनुमान है।