दरअसल एससी एसटी की पदोन्नति में आरक्षण का यह विवाद काफी पहले से ही चला आ रहा है। पूर्व में सुप्रीम कोर्ट ने ही कहा था कि पदोन्नति में आरक्षण का आधार स्पष्ट किया जाए।
2011 में विनोद प्रकाश नौटियाल ने उत्तराखंड हाईकोर्ट में आरक्षण को चुनौती दी तो कोर्ट के आदेश के आधार पर प्रदेश सरकार ने आरक्षण को खत्म करते हुए एससी एसटी वर्ग को पदोन्नति में आरक्षण का लाभ देने के लिए सरकार ने इस वर्ग के पिछड़ेपन से संबंधित आंकड़े जुटाना तय किया था।
इसके लिए इरशाद हुसैन कमेटी का गठन किया गया। हालांकि यह काम सरकार अभी तक नहीं कर पाई है। सर्वोच्च न्यायालय ने एससी/ एसटी के प्रमोशन में आरक्षण पर हाल ही में एम नागराज बनाम केंद्र सरकार के मामले में स्पष्ट कर दिया था कि एससी/ एसटी वर्ग को आरक्षण देना जरूरी नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि राज्य सरकारें चाहें तो इस पर फैसला ले सकती हैं।