डीएम रुद्रप्रयाग ने इसकी शिकायत सरकार से की लेकिन सरकार ने इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की। 5 फरवरी 2019 को सरकार ने बदरीनाथ, केदारनाथ में हेली सेवा के लिए इन 14 हेली कंपनियों से टेंडर प्रक्रिया आमंत्रित किए, लेकिन राज्य के सचिव उड्डयन ने इस निविदा को 16 फरवरी 2019 को संशोधित करके उन चार कंपनियों को भी निविदा प्रक्रिया में शामिल कर लिया, जिन्होंने सरकार के पूर्व आदेश के विरुद्ध चार अन्य हेलीपैड बना दिए थे।
याचिकाकर्ता ने इस टेंडर प्रक्रिया को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाकर्ता ने मामले में यूनियन ऑफ इंडिया,उत्तराखंड सिविल एविएशन डेवलपमेंट अथॉरिटी(उकाडा), डीएम रुद्रप्रयाग, एसडीएम ऊखीमठ सहित हेली कंपनियों देवदर्शन, सोना, पंचकेदार व तूरिया हेली को भी पक्षकार बनाया था।
सरकार की ओर से कहा गया कि आल वेदर रोड निर्माण के चलते अनेक हेलीपैड प्रभावित हुए हैं इसलिए क्षेत्र में अन्य हेलीपैड भी आवश्यक हैं। उकाडा की ओर से कहा गया कि निविदा प्रक्रिया नॉन शेड्यूल ऑपरेटर परमिट होल्डर के लिए थी तथा याची अधिकृत नहीं है । सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी।