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एसआईटी अध्यक्ष मंजूनाथ को कोर्ट में पेश होने के निर्देश समेत पढ़ें हाईकोर्ट की अहम खबरें...

Thu, 27 Feb 2020 11:02 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नैनीताल
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- फोटो : फाइल फोटोप्रतीकात्मक तस्वीर
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने उत्तराखंड के बहुचर्चित छात्रवृत्ति घोटाले के मामले में एसआईटी के अध्यक्ष टीसी मंजूनाथ को 4 मार्च को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं। मामले में हाईकोर्ट में प्राइवेट कॉलेज एसोसिएशन के सदस्य ने प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि वह छात्रवृत्ति की धनराशि जमा करना चाहते हैं। कोर्ट ने उन्हें दो दिन के भीतर 50 लाख रुपया जमा करने को कहा है। उन पर आरोप है कि उन्होंने एक करोड़ 91 लाख रुपये की छात्रवृत्ति का घोटाला किया है।

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मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार देहरादून निवासी रवींद्र जुगरान ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि समाज कल्याण विभाग की ओर से 2003 से अब तक अनुसूचित जाति और जनजाति के छात्रों की छात्रवृत्ति का भुगतान नहीं किया गया है। इससे स्पष्ट होता है कि 2003 से अब तक विभाग की ओर से करोड़ों रुपये का घोटाला किया गया है।

कहा कि 2017 में इसकी जांच के लिए तत्कालीन मुख्यमंत्री ने एसआईटी गठित की थी। इस दौरान तीन माह के भीतर जांच पूरी कर रिपोर्ट तैयार करने को कहा था, लेकिन इस मामले में आगे की कार्यवाही नहीं हो सकी। याचिकाकर्ता की ओर से इस प्रकरण की सीबीआई जांच कराने की मांग की गई थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने एसआईटी के अध्यक्ष टीसी मंजूनाथ को 4 मार्च को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होने के निर्देश हैं।

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हाईकोर्ट की सख्ती के बाद विधवा को पेंशन का 11.55 लाख का भुगतान

हाईकोर्ट की सख्ती के बाद शिक्षा विभाग ने 7 वर्ष बाद विधवा को उसके पति की पेंशन का 11,55,474 का भुगतान गत 17 फरवरी को कर दिया है। जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका को निस्तारित कर दिया। 

न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार ग्राम बानना भीमताल निवासी देवकी देवी ने हाईकोर्ट में सात साल पहले याचिका दायर कर कहा था कि उसके पति भूपाल दत्त शिक्षा विभाग में चतुर्थ श्रेणी के पद पर संतोषजनक सेवा करने के बाद जूनियर हाईस्कूल देवस्थल पिनरों विकासखंड से मई 2003 में सेवानिवृत्त हुए थे। याचिका में कहा कि उसके पति की पेंशन का भुगतान नहीं किया गया था।

इसी बीच, उसके पति की 9 सितंबर 2016 को मृत्यु हो गई थी।  इसके बाद कोर्ट ने 2017 में आदेश पारित कर समस्त देयकों का भुगतान करने के निर्देश दिए थे। शिक्षा विभाग ने इस आदेश को स्पेशल अपील के माध्यम से चुनौती दी। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया था कि सुप्रीम कोर्ट के दान सिंह बनाम सरकार के निर्णय में समस्त पेंशन लाभ देने के निर्देश हैं। शिक्षा विभाग की ओर से बताया गया कि याचिकाकर्ता को 11,55,474 का कर दिया गया है जिसके बाद याचिका निस्तारित कर दी गई है। 

चितई के गोलू देवता मंदिर मामले पर सुनवाई तीन को

हाईकोर्ट ने अल्मोड़ा के चितई के गोलू देवता मंदिर में जागेश्वर की तर्ज पर प्रबंधन समिति या ट्रस्ट बनाने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए तीन मार्च की तिथि नियत की है। कोर्ट ने डीएम से पूछा है कि वह बताएं कि इस संबंध में 2018 में जो जांच की गई है, उस रिपोर्ट का क्या हुआ। पूर्व में कोर्ट ने पुजारियों को याचिका में पक्षकार बनाने के निर्देश दिए थे, जिसके क्रम में उन्हें पक्षकार बनाया गया। बृहस्पतिवार को सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को पुजारी संतोष पंत, हरि विनोद पंत, प्रकाश पंत और कमल पंत को दस्ती नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। 

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार नैनीताल निवासी अधिवक्ता दीपक रूबाली ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि चितई गोलज्यू के मंदिर में हर वर्ष लाखों का चढ़ावा आता है। याचिका में कहा कि मंदिर के पुजारी और उनका परिवार ही इस चढ़ावे की धनराशि लेते हैं।

याचिकाकर्ता ने चितई गोलज्यू के मंदिर को ट्रस्ट बनाने की मांग की थी। इसी प्रकरण पर पूर्व में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता ने हाईकोर्ट में हस्तक्षेप प्रार्थना पत्र दायर कर कहा था कि वह गोलज्यू से संबंधित मामले में अपना पक्ष कोर्ट में रखेगें। उन्होंने कोर्ट में प्रार्थना पत्र दायर कर अलग से खाता खुलवाने की मांग करते हुए मंदिर में अनियमितताओं की जांच सहित चढ़ावे और दान की जांच कराने की मांग की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 3 मार्च की तिथि तय की है।
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हाईकोर्ट का कैग को ऑडिट कर शपथपत्र पेश करने के निर्देश 

हाईकोर्ट ने बहुद्देशीय वित्त विकास निगम की ओर से गरीबों के उत्थान के लिए स्वीकृत योजनाओं का करोड़ों रुपये बैंक में जमा करने के मामले में दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने कैग से ऑडिट कर शपथपत्र कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए हैं। 

मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हल्द्वानी निवासी चंद्रशेखर करगेती ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उत्तराखंड में वित्त विकास निगम की 2001 में स्थापना हुई थी। इसका उद्देश्य गरीब, निर्धन वर्ग के लोगों के उत्थान के लिए आसान किस्तों पर अनुदान स्वरूप ऋण देना था।

इस मद में निगम के पास करोड़ों रुपये हैं, लेकिन निगम ने यह राशि गरीबों को लघु व कुटीर उद्योग लगाने के लिए देने के बजाय बैंकों में जमा कर दिया। याचिका में कहा कि जमा राशि पर मिलने वाले ब्याज का दुरुपयोग किया जा रहा है। याचिका में कहा कि इस मामले को कैग ने वित्तीय अनियमितता माना है। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने कैग से ऑडिट कर शपथ पत्र कोर्ट में पेश करने के निर्देश दिए।
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