सेवायोजन और पेंशन आदि की सुविधा देने की मांग को लेकर आंदोलनरत उत्तराखंड के हजारों गुरिल्लों को हाईकोर्ट के एक फैसले ने बड़ी राहत दी है। अदालत ने उत्तराखंड में एसएसबी के गुरिल्लों और उनकी विधवाओं को मणिपुर की तरह नौकरी और सेवानिवृत्ति के लाभ तीन माह के भीतर देने के आदेश दिए हैं। इस आदेश से राज्य के 20 हजार से अधिक गुरिल्लों और उनके परिवारों को लाभ होगा।
उत्तराखंड में गुरिल्ले लंबे समय से संघर्षरत हैं। पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में गुरिल्लों ने 2004 में संगठन बनाकर सेवायोजित करने और पेंशन देने की मांग को लेकर आंदोलन शुरू किया। अल्मोड़ा में गुरिल्ले पिछले करीब 12 साल से अधिक समय से धरना दे रहे हैं। देहरादून से लेकर दिल्ली के जंतर मंतर तक गुरिल्लों ने आंदोलन किया लेकिन किसी भी सरकार ने उनकी मांग पूरी नहीं की। गुरिल्लों का दावा है कि उत्तराखंड में एसएसबी से शस्त्र संचालन का प्रशिक्षण प्राप्त करीब 20 हजार से अधिक गुरिल्ले हैं।
चीन युद्ध के समय सामने आई कमजोरियों से सबक लेते हुए युद्ध समाप्त होने के बाद 1963 में अस्तित्व में आए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) का प्राथमिक कार्य रिसर्च एंड एनालिसिस विंग (रॉ) के लिए सशस्त्र सहायता प्रदान करना था। इसके तहत सीमा क्षेत्र के लोगों में राष्ट्रीय भावना का प्रसार और प्रतिरोध के लिए अपनी क्षमताओं को विकसित करने में उनकी सहायता करना था। यह बल गांव के लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देता था। इस बेसिक कोर्स से चुने गए युवक-युवतियों को 45 दिन की कठिन गुरिल्ला ट्रेनिंग दी जाती थी। हर बार के प्रशिक्षण में गुरिल्लों को प्रशिक्षण अवधि का एक निश्चित मानदेय दिया जाता था।