हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए निर्वाचान आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए। अदालत ने कहा है कि अगर कोई संवैधानिक संस्था अपने कार्य का निर्वहन सही तरीके से नहीं करती है तो हाईकोर्ट के पास आयोग को दिशा निर्देश देने का अधिकार है।
कोर्ट ने कहा कि सदस्यों को हाईजैक नहीं किया जा सकता है, ये आदेश उस पर रोक लगाता है। चुनाव आयोग की यह संवैधानिक जिम्मेदारी है कि पंचायत चुनाव निष्पक्ष और साफ सुथरे तरीके से हों। हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग की गाइडलाइन को 17 साल पुराना मानते हुए इसमें बदलाव की जरूरत जताई है। हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग को आदेश दिया है कि अगर इन चुनावों में भ्रष्टाचार की शिकायत अखबारों या अन्य किसी भी माध्यम से मिलती है तो उसके लिए एक शिकायत प्रकोष्ठ का गठन करें और एफआईआर दर्ज करें।
कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि अगर किसी प्रत्याशी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत मिली तो तत्काल चुनाव को रोका भी जा सकता है और उनका नामांकन और चुनाव लड़ने पर भी रोक लगाई जा सकती है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि चुनाव में सदस्यों की खरीद फरोख्त रोकने के क्रम में उनके विदेश खासतौर पर नेपाल जाने पर नजर रखें और पासपोर्ट चेक करें।