संशोधन में जोड़ी धारा में जुड़वां दो या तीन बच्चों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने की वजह से असमंजस की स्थिति बनी थी। याचिकाकर्ता का एक पुत्र और फिर जुड़वां पुत्र हुए थे। भारत ने यूनिटी लॉ कॉलेज के प्राचार्य डॉ. केएस राठौर से चर्चा के बाद हाईकोर्ट में अधिवक्ता कुर्बान अली के माध्यम से एक याचिका निकाय चुनाव से ठीक पहले दाखिल की थी।
अधिवक्ता कुर्बान अली ने कोर्ट के समक्ष जावेद अहमद और अन्य बनाम हरियाणा राज्य एवं अन्य मामले रखे थे। हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति शरद कुमार शर्मा की एकल पीठ ने याचिका पर सुनवाई के बाद निर्णय दिया कि नगर निगम अधिनियम की संशोधित धारा से याचिकाकर्ता भारत भूषण को अयोग्य नहीं माना जाएगा।
जुड़वां बच्चे होने की स्थितियों में याचिकाकर्ता का कोई नियंत्रण नहीं था। कोर्ट ने पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के फैसले के मद्देनजर और उत्तराखंड सरकार द्वारा संशोधित अधिनियम की धारा को वैध ठहराते हुए याचिकाकर्ता के मामले को अपवादिक परिस्थिति माना और उसे चुनाव लड़ने के लिए योग्य ठहराया है।