आखिरकार हरिद्वार की जिला पंचायत अध्यक्ष ने हाईकोर्ट से अध्यक्ष पद के प्रशासनिक अधिकार बहाल होने के बाद अब वित्तीय अधिकार भी हासिल करके दूसरी लड़ाई भी जीत ली है। इस मामले में एक तरह से प्रदेश सरकार की किरकिरी भी हो गई है। अध्यक्ष के समर्थकों में फैसले से खुशी की लहर है।
जिलाधिकारी ने जिला पंचायत हरिद्वार के कार्यों की जांच में अनियमितता का आरोप लगाते हुए शासन को रिपोर्ट भेजी थी। जिसके बाद शासन ने चार दिसंबर 2017 को जिला पंचायत अध्यक्ष सविता चौधरी को बर्खास्त कर दिया था।
साथ ही जिला पंचायत सदस्यों की तीन सदस्यीय कमेटी का गठन कर जिला पंचायत के कामकाज की बागडोर सौंप दी थी। इसी बीच जिला पंचायत अध्यक्ष शासन के आदेशों के खिलाफ हाईकोर्ट पहुंची विगत 12 मार्च को हाईकोर्ट ने अध्यक्ष सविता चौधरी के प्रशासनिक अधिकार को बहाल करने के साथ ही प्रदेश सरकार को वित्तीय अधिकार के मामले में चार सप्ताह में निर्णय दिए जाने के आदेश दिए थे।
किसान आयोग के अध्यक्ष चौधरी राजेंद्र सिंह ने बताया कि उनकी ओर से शासन को नियत समय पर जवाब दाखिल करा दिया गया था, लेकिन सरकार वित्तीय अधिकार के मामले में कोई निर्णय नहीं ले सकी। लिहाजा उन्होंने हाईकोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया । जिस पर बुधवार को हाईकोर्ट ने अध्यक्ष के वित्तीय अधिकार भी बहाल कर दिए। उन्होंने कहा कि अब सभी को साथ लेकर रुके हुए विकास कार्यों को तेजी से पूरा किया जाएगा। हाईकोर्ट के इस फैसले से समर्थकों में खुशी की लहर है।