प्रदेश के नगर निकायों के परिसीमन के मामले में दायर याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए हाइकोर्ट ने राज्य सरकार से यथास्थिति बनाए रखने को कहा है। प्रदेश में नगर निकाय चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में सरकार के लिए यह जोर का झटका माना जा रहा है। हालांकि, सरकारी पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार जिन क्षेत्रों का परिसीमन हो चुका है वहां स्थगन आदेश के बाद भी परिसीमन यथावत रहेगा और इस पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।
सोमवार को न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ ने ग्रामीण क्षेत्रों को पालिका में शामिल करने के मामले में यथास्थिति बनाए रखने के निर्देश दिए। सरकार ने कुछ समय पूर्व अधिसूचना जारी कर राज्य की विभिन्न नगरपालिकाओं और नगर निगम में आसपास के कई गांवों को शामिल करने का आदेश पारित किया था।
इसके बाद भवाली के संजय जोशी, हल्द्वानी के भोला दत्त भट्ट, ग्राम पंचायत बाबूगढ़, संघर्ष समिति कोटद्वार, पिथौरागढ़ के ग्राम बस्ते धनौरा नरदौला के निवासियों सहित प्रदेश के कई ग्रामीणों ने सरकार के आदेश को कोर्ट में चुनौती दी थी। याचिकाओं में कहा गया था कि अनेक ग्राम पंचायतों का कार्यकाल अभी बाकी है। गांवों को पालिका में शामिल कर ग्रामीण जन प्रतिनिधियों के पद छीने जाने की साजिश की जा रही है।
कृषि प्रधान इन ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि पर भी इस निर्णय से विपरीत प्रभाव पड़ेगा। याचिका में कहा गया कि सरकार ने बिना सुनवाई के और किसी प्रक्रिया को अपनाए बिना ही गांवों को नगर निकायों में शामिल किया जो गलत है।
एकलपीठ ने मामले पर सुनवाई करते हुए यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए। साथ ही निर्देशित किया कि अधिसूचना के जो बिंदु याचिका में हैं, उनके अनुपालन में सरकार कोई कार्रवाई न करे। उधर, सरकारी पक्ष के अधिवक्ताओं के अनुसार जिन क्षेत्रों का परिसीमन हो चुका है वहां स्थगन आदेश के बाद परिसीमन यथावत रहेगा और इस पर कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।