केंद्र सरकार ने 2015 में अधिसूचना जारी कर कंपनियों से आईटी एक्ट के तहत इन साइट्स को बंद करने को कहा था। कंपनियों ने इन साइट्स को ब्लॉक नहीं किया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश राजीव शर्मा एवं न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की खंडपीठ ने बृहस्पतिवार को सुनवाई करते हुए सभी इंटरनेट सर्विस प्रोवाइडर लाइसेंस धारकों को 31 जुलाई 2015 की केंद्र की अधिसूचना का पालन करने और पोर्न साइट्स ब्लॉक करने का आदेश जारी किया।
कोर्ट ने कहा कि 2015 की अधिसूचना पर्याप्त न हो तो आईटी एक्ट 2000 का सहारा लिया जाए। कोर्ट ने कहा कि यदि इंटरनेट सर्विस लाइसेंस होल्डर 31 जुलाई 2015 की अधिसूचना का पालन नहीं करते हैं तो केंद्र सरकार उनका लाइसेंस निरस्त करे। इसी के साथ कोर्ट ने प्रदेश सरकार से कहा है कि वह किशोरी से दुष्कर्म के मामले की जांच आठ सप्ताह में पूरी कराए।
हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि, हम इस बात का ज्यूडिशियल नोटिस ले सकते हैं कि नाबालिगों के प्रति यौन अपराध के मामले बढ़ रहे हैं। बच्चे शिक्षण संस्थाओं तक में सुरक्षित नहीं हैं। एक याचिका के तहत हमने हल्द्वानी में एक स्कूल वैन में मासूम के साथ दुष्कर्म के मामले का भी संज्ञान लिया है।
जांच पूरी कर रिपोर्ट के आदेश
हाईकोर्ट ने दून अस्पताल में जच्चा बच्चा की असमय मौत के मामले का भी स्वत: संज्ञान लेते हुए प्रदेश के मुख्य सचिव को मामले की जल्द से जल्द जांच पूरी कर रिपोर्ट देने के आदेश दिए हैं।