कोर्ट ने स्पेशल अपील को स्वीकार करते हुए उन चिकित्सकों को कार्यभार ग्रहण करने या 18 प्रतिशत के ब्याज के साथ मूल फीस जमा करने को कहा। चीफ स्टैंडिंग काउंसिल परेश त्रिपाठी ने बताया कि सरकार ने चिकित्सकों के पक्ष के खिलाफ तर्क देते हुए कहा कि उन्होंने बांड की शर्तें प्रवेश के पूर्व प्रोस्पेक्टस और ब्रोशर में दिए थे जिस पर चिकित्सकों ने हस्ताक्षर भी किए हैं।
उन्होंने कहा कि इन लोगों ने रियायती फीस का फॉर्म भरकर शर्त मानने से बचना चाहा। खंडपीठ के आदेश के बाद अब इन चिकित्सकों को छह माह में ज्वाइनिंग लेटर लेकर सेवा देनी होगी या फीस में ली गई छूट और उस पर 18 प्रतिशत की दर से ब्याज का भुगतान करना होगा।