उच्च न्यायालय ने भूमि को खाली कराने के उस आदेश पर 17 सितंबर 2013 को रोक लगा दी थी । संत आसाराम को वन्यभूमि से बाहर करने की शिकायत स्टीफेन दुंगे ने वन विभाग से की । उन्होंने आसाराम की इंटरवेंशन याचिका डाली थी । उन्होंने 20 वर्षों तक दी गई 1950 की ओरिजिनल लीज डीड भी कोर्ट के सम्मुख पेश की है ।
अधिवक्ता कार्तिकेय हरिगुप्ता ने बताया कि उन्होंने न्यायालय को बताया कि संत आसाराम के आश्रम में अवैध निर्माण के कारण भी वन विभाग ने उन्हें फरवरी 2013 में नोटिस जारी किया था । अधिवक्ता ने बताया कि एकलपीठ ने अपने आदेश में कहा है कि लीज डीड 1970 में खत्म हो गई थी, जिसे रिन्यू नहीं कराया गया था ।
न्यायालय ने कहा है कि ये भी साफ है कि आश्रम प्रबंधन बिना वन विभाग की अनुमति के वन गतिविधियां चला रहा है । इस कारण से कोर्ट के पूर्व आदेश को निरस्त किया जाता है और वन विभाग के 9 सितंबर 2013 के वनभूमि खाली करने के आदेश को प्रभावी किया जाता है।