वरिष्ठ कारागार अधीक्षकों और कारागार अधीक्षकों के सात पदों पर पुलिस विभाग के अधिकारियों को नियुक्त किए जाने पर हाईकोर्ट ने सरकार से दो सप्ताह के भीतर जवाब मांगा है। मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष काशीपुर के अधिवक्ता संजीव कुमार आकाश की जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिकाकर्ता का कहना था कि 12 फरवरी 2021 को जारी सरकार के आदेश के तहत राज्य के कारागारों में वरिष्ठ कारागार अधीक्षकों व कारागार अधीक्षकों के रिक्त पदों पर पुलिस विभाग के अधिकारियों की नियुक्तियां कर दीं गईं जो असांविधानिक हैं।
याचिका में कहा गया कि कारागार अधीक्षकों के पदों पर पुलिस विभाग के अधिकारियों की नियुक्ति से जेल में कैदियों के साथ दुर्व्यवहार होने की आशंका है। इससे न्यायिक हिरासत और पुलिस हिरासत के बीच का अंतर समाप्त हो जाएगा। याचिकाकर्ता का कहना था कि जेल अधीक्षकों के पदों पर पुलिस विभाग के अधिकारियों की नियुक्तियों को निरस्त किया जाए क्योंकि जेल एक सुधार गृह है और वहां पुलिस विभाग के अधिकारियों को नियुक्त करना न्यायविरुद्ध है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार को दो सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।