हाईकोर्ट में समाज कल्याण विभाग में अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को दी जाने वाली छात्रवृति में हुए पांच सौ करोड़ रुपये के घोटाले के मामले में दायर जनहित याचिका पर अब अन्य बेंच सुनवाई करेगी।
बुधवार को मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन व न्यायमूर्ति एनएस धनिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। जिसमें न्यायमूर्ति एनएस धनिक ने इस प्रकरण पर सुनवाई से इंकार कर दिया। इसके बाद अब अन्य बेंच सुनवाई करेगी।
मामले के अनुसार देहरादून निवासी रविन्द्र जुगरान ने हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर कर कहा था कि प्रदेश के हजारों अनुसूचित जाति व जनजाति के छात्रों को केंद्र सरकार की ओर से छात्रवृत्ति दी जाती है।
परंतु समाज कल्याण विभाग ने इसे लाभार्थियों को न बांटकर सरकारी धन का दुरुपयोग किया है। देहरादून और हरिद्वार जिलों में हजारों छात्रों को यह छात्रवृत्ति न देकर करीब पांच सौ करोड़ से अधिक का घपला किया गया।
याचिका में कहा गया कि महालेखाकार भारत सरकार, निदेशक समाज कल्याण व अपर सचिव समाज कल्याण के नोटिंग के आधार पर इस घपले के तार राज्य से बाहर भी जुड़े हैं। याचिकाकर्ता की ओर से मांग की गई कि इस प्रकरण की जांच सीबीआई से कराई जाए।