नैनीताल हाईकोर्ट ने पुलिस दरोगा भर्ती परीक्षा में एक उत्तीर्ण अभ्यर्थी को नियुक्ति न देने पर कड़ा रुख अपनाते हुए निकट भविष्य में होने वाली भर्ती में एक पद इस अभ्यर्थी के लिए आरक्षित रखने के निर्देश सरकार को दिए हैं। कोर्ट ने मामले में सरकार की ओर से दायर स्पेशल अपील को खारिज कर दिया है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। जितेंद्र जोशी ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कर कहा था कि 2001 में हुई दरोगा भर्ती परीक्षा के लिए उसने भी आवेदन किया था। वह लिखित परीक्षा में उत्तीर्ण था। शारीरिक परीक्षा में भी वह सफल रहा।
उसे इंटरव्यू के लिए बुलाया गया, लेकिन इंटरव्यू में उसे 40 में से केवल 7 नंबर ही दिए गए, जबकि अन्य उम्मीदवारों के नंबर 22 से अधिक थे। उसे इंटरव्यू के बाद ही बाहर कर दिया गया।
याचिका में कहा कि वह स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित श्रेणी का उम्मीदवार था। इस वर्ग के लिए आरक्षित पांच पदों के लिए छह उम्मीदवार मेडिकल के लिए बुलाए गए थे, लेकिन एक उम्मीदवार मेडिकल के लिए नहीं आया। जिस कारण उसका चयन होना स्वभाविक था। याचिकाकर्ता ने मैरिट सूची में कई अन्य गड़बड़ियों की भी जानकारी दी थी।
दरोगा भर्ती में गड़बड़ियों पर हुई थी सीबीआई जांच
दरोगा भर्ती प्रकरण में गड़बड़ियां होने पर कई अन्य अभ्यर्थियों ने भी कोर्ट की शरण ली थी और दरोगा भर्ती की सीबीआई जांच हुई थी। पूर्व में कोर्ट ने याचिकाकर्ता को अपना प्रत्यावेदन सरकार को देने को कहा था, लेकिन सरकार ने उसका प्रत्यावेदन निरस्त कर दिया था।
जिसके बाद उसने फिर हाईकोर्ट में याचिका दायर की। 27 मई 2020 को एकलपीठ ने आदेश पारित कर सरकार को याचिकाकर्ता को नियुक्ति देने के आदेश दिए थे। इस आदेश के खिलाफ सरकार ने खंडपीठ के समक्ष स्पेशल अपील की थी। पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सरकार की अपील को खारिज करते हुए भविष्य में होने वाली भर्ती में एक पद याची के लिए रिक्त रखने के आदेश दिए हैं।