याचिकाकर्ता ने मृत आश्रित कोटे की नौकरी उनको दिए जाने के लिए हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इसके बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार को आदेश दिए थे कि विवाहित बेटियों को भी सरकारी नौकरियों में परिवार की देखभाल के लिए मृतक आश्रित कोटे की नौकरी दी जाए।
इसके खिलाफ सरकार ने विशेष अपील दायर की थी। एकलपीठ के इस आदेश को मुख्य न्यायधीश ने सुनवाई के लिए लार्जर बेंच को रेफर कर दिया था। जिसमें कहा गया था कि विवाहित बेटियों को सरकारी नौकरी दी जाए या नही। पूर्व में लार्जर बेंच ने सुनवाई के बाद निर्णय को सुरक्षित रख लिया था।
उस वक्त कोर्ट ने पूछा था कि क्या विवाहित पुत्री परिवार का सदस्य है और क्या वे मृतक आश्रित कोटे से सरकारी नौकरी पाने की हकदार है या नहीं। अब दोनों पक्षों की सुनवाई के बाद हाईकोर्ट की लार्जर बेंच ने मृतक आश्रित कोटे में शामिल विवाहित पुत्रियों को सरकारी नौकरी दिए जाने के मामले में विवाहित बेटी को परिवार का सदस्य मानते हुए कहा है सरकारी नौकरी का हकदार बताया है।