नैनीताल हाईकोर्ट में भाजपा सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी की ओर से चारधाम देवस्थानम एक्ट को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान रूलक संस्था ने एक्ट का समर्थन करते हुए जनहित याचिका निरस्त करने की मांग की। रूलक संस्था और राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि एक्ट पूरी पारदर्शिता से बनाया गया है।
मुख्य न्यायाधीश रमेश रंगनाथन एवं न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की खंडपीठ के समक्ष वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से मामले की सुनवाई हुई। इस प्रकरण पर कोर्ट में रूलक संस्था ने एक्ट का समर्थन करते हुए जनहित याचिका निरस्त करने की मांग की। रूलक संस्था और राज्य सरकार के अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि एक्ट पूरी पारदर्शिता से बनाया गया है। इसमें मंदिरों के चढ़ावे का रिकॉर्ड दर्ज हो रहा है। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई बृहस्पतिवार 2 जुलाई को भी जारी रखी है।
मामले के अनुसार देहरादून की संस्था रूलक ने सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी की दायर जनहित याचिका निरस्त करने को प्रार्थनापत्र दिया था। इसमें कहा गया है कि प्रदेश सरकार की ओर से चारधाम के प्रबंधन के लिए लाया गया देवस्थानम बोर्ड अधिनियम सांविधानिक है। इसके जरिए सरकार चारधाम और 51 अन्य मंदिरों का प्रबंधन लेना संविधान के अनुच्छेद 25 और 26 का उल्लंघन नहीं है। चार धाम यात्रियों की सुविधाओं को ध्यान में रखकर राज्य सरकार ने बोर्ड अधिनियम बनाकर मंदिरों का प्रबंधन लिया है। इससे कहीं भी हिंदू धर्म की भावनाएं आहत नहीं हो रहीं हैं। संस्था का कहना है कि सुब्रह्मण्यम स्वामी की याचिका निराधार है, इसलिए इसे निरस्त किया जाए।