न्यायालय ने प्रस्तुत साक्ष्यों और फोटोग्राफ्स को देखने के बाद माना गया कि ये संरचनाएं पूरी तरह से खस्ताहाल, जर्जर और मानव निवास के लिए अनुपयुक्त हो चुकी हैं। न्यायालय ने कहा कि इन ढांचों के बने रहने से वन्य जीवों को खतरा हो सकता है, क्योंकि ये संरचनाएं कभी भी गिर सकती हैं और वन्यजीवों की आवाजाही में बाधा बन सकती हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि कुछ याचिकाकर्ताओं ने आपत्ति जताई थी कि कुछ संरचनाओं की छतें अन्य मकानों से जुड़ीं हुईं हैं लेकिन इसके समर्थन में कोई ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया।
इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए न्यायालय ने जिला मजिस्ट्रेट और कॉर्बेट टाइगर रिजर्व के निदेशक को निर्देश दिया कि वे सार्वजनिक नोटिस जारी कर कम से कम 15 दिनों की सूचना के बाद इन ढांचों को ध्वस्त करें। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि जहां लोग स्थायी रूप से निवास कर रहे हैं, उन संरचनाओं को कोई क्षति न पहुंचे। न्यायालय ने प्रशासन को यह प्रक्रिया यथाशीघ्र और कुशलतापूर्वक पूरा करने के निर्देश दिए हैं।