याची का कहना था कि पूर्व मुख्यमंत्रियों के भवन के किराये को वर्ष 1997 और 2004 के सरकारी आदेश के अनुसार तय किया गया है, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने अवैध घोषित किया है।
याची ने पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा और रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ द्वारा जमा किए गए बेहद कम किराये पर भी सवाल खड़े करते हुए बाजार मूल्य के हिसाब से वसूली करने की मांग की थी। पूर्व मुख्यमंत्रियों के आवासों के किराये में अब तक बाजार मूल्य के आधार पर संशोधित किराया वसूला नहीं गया है।