नैनीताल हाईकोर्ट में विधायक महेंद्र भाटी की हत्या के मामले में यूपी के पूर्व सांसद डीपी यादव सहित तीन अन्य को मिली आजीवन कारावास की सजा को चुनौती देने वाली अपीलों पर हुई सुनवाई में सीबीआई ने मंगलवार को कोर्ट में अपना पक्ष रखा। सीबीआई की ओर से कहा गया कि दोषियों ने महेंद्र भाटी पर एके 47 से गोलियां बरसाईं थीं, जिस कारण उसकी मौत हो गई थी। इसलिए इनकी अपीलें निरस्त करने योग्य हैं। मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 अगस्त की तिथि नियत की है।
पूर्व में कोर्ट ने मेडिकल चेकअप कराने के लिए डीपी यादव को शार्ट टर्म बेल दी थी। इसकी अवधि समाप्त होने से पहले कोर्ट ने उनकी शार्ट टर्म बेल की अवधि दो माह और बढ़ा दी थी। कोर्ट ने उन्हें पहले 20 अप्रैल 2021 को दो माह की शार्ट टर्म बेल दी थी जिसकी अवधि 20 जून 2021 को समाप्त हो गई थी। उसके बाद डीपी यादव की ओर से शर्ट टर्म बेल की अवधि बढ़ाने के लिए प्रार्थना पत्र पेश किया गया था।
मुख्य न्यायाधीश आरएस चौहान एवं न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार 13 सितंबर 1992 को गाजियाबाद के विधायक महेंद्र भाटी की डीपी यादव, परनीत भाटी, करन यादव व पाल सिंह उर्फ लक्कड़ पाला ने हत्या कर दी थी। 15 फरवरी 2015 को देहरादून की सीबीआई कोर्ट ने चारों हत्यारों को आजीवन कारावास की सजा सुनवाई थी। इस आदेश को चारों अभियुक्तों ने हाईकोर्ट में अपील दायर कर चुनौती दी थी।
विधायक महेश नेगी मामले में सरकार को पांच तक जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने द्वाराहाट से भाजपा विद्यायक महेश नेगी के डीएनए प्रस्तुत करने के मामले पर सुनवाई के बाद सरकार को 5 अक्तूबर तक जांच रिपोर्ट के साथ शपथपत्र पेश करने के निर्देश दिए हैं। सुनवाई के दौरान विपक्षी की ओर से कोर्ट को अवगत कराया गया कि अभी तक डीएनए रिपोर्ट पेश नहीं की गई है। पीड़िता ने यह भी कहा कि महेश नेगी की डीएनए जांच कराई जाए क्योंकि वे ही उसकी बेटी के पिता हैं। जांच में इस बात की भी पुष्टि हुई है कि कई जगहों पर विधायक उनके साथ रहे हैं। उनको पूर्व में दिया गया स्टे ऑर्डर भी निरस्त किया जाए।
न्यायमूर्ति आरसी खुल्बे की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार पीड़िता ने 6 सितंबर 2020 को नेहरू कालोनी देहरादून में एक प्रार्थना पत्र देकर कहा था कि विधायक महेश नेगी ने उनका यौन शोषण किया है अब दोनों पति पत्नी उसे जान से मारने की धमकी भी दे रहे हैं। याचिका में कहा कि इस मामले जांच कर रहे दो आईओ को भी सरकार ने बदल दिया है क्योंकि विधायक सत्तारूढ़ पार्टी का विधायक है इसलिए मामले की जांच सीबीआई से कराई जाए। याचिकाकर्ता ने कहा कि देहरादून पुलिस इस मामले की जांच करने में पक्षपात रवैया अपना रही है और सही तरीके से जांच भी नही कर रही है। जबकि उसके पास विधायक के सभी कारनामों की रिकॉर्डिंग भी उपलब्ध है।