बता दें कि 18 वर्षों तक न्यायालय में चले वाद के बाद उच्च न्यायालय के आदेश पर न्यायालय के रजिस्ट्रार की मौजूदगी में गुरुद्वारा प्रबंध कमेटी का चुनाव हुआ था। तीस सदस्यीय कमेटी के चुनाव के बाद दिसंबर 2016 को जसविंदर सिंह गिल गुरुद्वारे के प्रधान बने थे।
चुनाव अधिकारी द्वारा डेढ़ वर्ष के कार्यकाल के उपरांत कोर्ट कमिश्नर विवेक द्विवेदी ने गिल की जगह पर सेवा सिंह को 30 जून 2018 को शेष बचे साढ़े तीन वर्ष के कार्यकाल के लिए गुरुद्वारा श्री नानकमता साहिब का प्रधान नियुक्त कर दिया था।
जिसको लेकर जसविंदर सिंह गिल ने हाईकोट में वाद दायर किया था। गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के प्रबंधन को लेकर उभरे नए विवाद के चलते गुरुद्वारा साहिब के प्रबंधन को लेकर विवाद एक बार पुन: चरम पर पहुंचने की संभावना है।