नैनीताल हाईकोर्ट ने क्वारंटीन सेंटरों और कोरोना अस्पतालों की बदहाली के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई के बाद राज्य सरकार से पूछा है कि वह प्लाज्मा थेरेपी ट्रीटमेंट के तहत क्या कार्रवाई कर रही है। सरकार इस संबंध में शपथपत्र पेश कर कोर्ट को अवगत कराएं। वहीं, कोर्ट ने याचिकाकर्ताओं से कहा है कि वे बताएं कि कोविड से लड़ने के लिए और क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं। कोर्ट ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 23 सितंबर की तिथि नियत की है।
कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश रवि कुमार मलिमथ एवं न्यायमूर्ति एनएस धानिक की खंडपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। मामले के अनुसार हाईकोर्ट के अधिवक्ता दुष्यंत मैनाली ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि राज्य सरकार ने प्रदेश के 6 अस्पतालों को कोविड-19 के रूप में स्थापित किया है लेकिन इनमें कोई भी आधारभूत सुविधाएं नहीं है। देहरादून के सच्चिदानंद डबराल ने उत्तराखंड लौट रहे प्रवासियों की मदद और उनके लिए बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के मामले में जनहित याचिका दायर की थी।
कोर्ट के पूर्व के आदेशों के क्रम में जिला विधिक प्राधिकरण ने बदहाल क्वारंटीन सेंटरों के मामले में जांच की। प्राधिकरण सचिव ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट कोर्ट में पेश की। इसमें माना कि उत्तराखंड के सभी क्वारंटीन सेंटर बदहाल स्थिति में हैं। सरकार की ओर से वहां पर प्रवासियों के लिए कोई उचित व्यवस्था नहीं की गई है और ना ही ग्राम प्रधानों के पास कोई फंड उपलब्ध है।
सैनिटाइजेशन के लिए दो शनिवार रजिस्ट्री की जाएगी बंद
हाईकोर्ट परिसर में 19 और 26 सितंबर को सैनिटाइजेशन करने के लिए रजिस्ट्री को बंद किया गया है। इस कारण दो शनिवार हाईकोर्ट का रजिस्ट्री कार्यालय बंद रहेगा। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल हीरा सिंह बोनाल ने इस संबंध में नोटिफिकेशन जारी कर यह सूचना दी है।