राजकीय दून मेडिकल कॉलेज व सुशीला तिवारी राजकीय मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में बांड की व्यवस्था खत्म करने को लेकर हाईकोर्ट ने सख्ती बरती है। कोर्ट ने इसके बदले साढे़ चार लाख रुपये फीस निर्धारित करने के मामले में सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए हैं।
न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की एकलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। देहरादून निवासी प्राची भट्ट और अन्य ने हाईकोर्ट में 29 जून 2019 के शासनादेश को चुनौती देते हुए कहा था कि इस शासनादेश के तहत राजकीय दून मेडिकल कॉलेज और सुशीला तिवारी मेडिकल कॉलेज हल्द्वानी में बांड की व्यवस्था समाप्त कर साढे़ चार लाख रुपये फीस निर्धारित कर दी गई है।
याचिका में कहा गया कि वीर चंद्र गढ़वाली मेडिकल कॉलेज में ऐच्छिक आधार पर बांड की व्यवस्था कर पचास हजार रुपये फीस रखी गई है। उत्तराखंड के मूल निवासी और आर्थिक रूप से पिछडे़ वर्ग के लिए दून मेडिकल कॉलेज और हल्द्वानी मेडिकल कॉलेज में बांड की व्यवस्था न करना भेदभावपूर्ण है। याचिका में यह भी कहा गया कि राज्य सरकार ने इस तथ्य का भी संज्ञान नहीं लिया कि भारत के अन्य राज्यों में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बहुत कम फीस है।
उत्तराखंड में सरकारी मेडिकल कॉलेजों में फीस नियमन के लिए कोई नियामक संस्था नहीं है, जिस कारण मनमाने तरीके से शासनादेश जारी किए जा रहे है। पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट की एकलपीठ ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।