अदालत ने कहा कि महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश और केरल में डेल्टा प्लस वैरिएंट केस आ चुके हैं, आपकी तैयारियां कहां पहुंचीं। आप तैयारियों को लेकर समय बताएं, कब तक क्या करेंगे। आपके पास पांच मेडिकल कॉलेज हैं, बाकी जिलों के बच्चों का क्या होगा। बागेश्वर और पिथौरागढ़ के बच्चों के लिए क्या करेंगे। चीफ जस्टिस ने कहा कि मान लीजिए मैं एक अभिभावक हूं और बागेश्वर में रहता हूं, रात में बच्चे की हालत बिगड़ती है तो उसे लेकर पहाड़ों में कहां भागूंगा।
पर्याप्त एंबुलेंस का दावा झूठा
हाईकोर्ट ने कहा कि आपका पर्याप्त एम्बुलेंस का दावा झूठा है। दिल्ली-फरीदाबाद में एंबुलेंस नहीं मिली और आप कहते हैं आपके पास उत्तराखंड में पर्याप्त एम्बुलेंस हैं। आप पर्याप्त एंबुलेंस की बात करते हैं लेकिन खबरें आती हैं कि पहाड़ों में गर्भवती महिलाओं को एंबुलेंस नहीं मिलती है और पालकी से ले जाना पड़ता है। हमें मूर्ख बनाना बंद कीजिए हकीकत हमें पता है। चीफ जस्टिस को मत बताइए कि उत्तराखंड में रामराज्य है और हम स्वर्ग में रहते हैं।
आप रोडवेज के चालक-परिचालकों को पांच महीने से वेतन नहीं दे पा रहे हैं। दिक्कत ये है कि हमारे नौकरशाहों को नहीं पता कि राज्य के हालात क्या हैं। स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि अगले एफिडेविट में तीसरी लहर को लेकर तैयारियों की पूरी जानकारी देंगे। कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव से कहा कि डेल्टा प्लस वैरिएंट के मूल खतरे को आप समझ नहीं पाए। उसमें ऑक्सीजन युक्त एंबुलेंस की सबसे ज्यादा दरकार है। कोर्ट ने कहा कि राज्य में 0-18 आयु के बच्चे कितने हैं और ऑक्सीजन युक्त कितनी एंबुलेंस हैं उसकी जानकारी अगली सुनवाई में बताएं। कोर्ट ने कहा कि स्वास्थ्य सचिव अगली सुनवाई में राज्य में बच्चों के लिए कितने आईसीयू, बेड, ऑक्सीजन कंसंट्रेटर और एम्बुलेंस हैं इसकी जानकारी दें।
ब्लैक फंगस से निपटने की तैयारियों को लेकर भी हाईकोर्ट ने फटकार लगाई। कोर्ट ने कहा कि ध्यान रहे हम कोरोना और ब्लैक फंगस से एक साथ दोहरा युद्ध लड़ रहे हैं और आपकी तैयरियां कैसी हैं किसी से छिपी नहीं हैं। याचिकाकर्ता दुष्यंत मैनाली ने कहा कि राज्य सरकार जो मेडिकल उपकरण खरीद रही है, उनको ऑपरेट करने वाले नहीं होने से मरीजों को लाभ नहीं मिल पा रहा है।
कोर्ट ने स्वास्थ्य सचिव को आदेश देते हुए कहा है कि वे अपने अगले शपथ पत्र में बताएं कि प्रदेश में कुल कितने गांव सड़क से नहीं जुड़े हैं, इन गांवों का निकटस्थ रोड हेड कितनी दूर है, स्वास्थ्य विभाग के पास कुल कितनी एंबुलेंस हैं, 108 सेवा के पास कितनी एंबुलेंस है, यह सभी एंबुलेंस कहां-कहां तैनात की गई हैं, कितनी एंबुलेंस संचालन में हैं और कितनी बेकार पड़ी हैं। तीसरी लहर के लिए बाल रोग विशेषज्ञों की जो हाई पावर कमेटी बनाई गई थी, उसने अपनी रिपोर्ट में जो संस्तुतियां की हैं उनके अनुपालन की क्या स्थिति है। प्रदेश में बच्चों के लिए कुल कितने वार्ड कितने अस्पतालों में हैं और उन में कितने पीडियाट्रिक बेड हैं। प्रदेश में कौन से ऐसे सरकारी अस्पताल हैं जिनमें अब तक बच्चों के वार्ड नहीं हैं। प्रदेश में सरकारी अस्पतालों में कुल कितने एनआईसीयू है। ग्राम स्तर पर स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कितने ऑक्सीजन कंसंट्रेटर सिलेंडर आदि की सुविधा है और किनमें नहीं है।
रामनगर में पूर्व में कोर्ट के आदेशों से एक छोटा निजी कोविड-19 अस्पताल बनाया गया था लेकिन तीसरी लहर के लिए रामनगर में कोविड-19 के अस्पताल की क्या तैयारियां की गई हैं और सरकार रामनगर में तीसरी लहर के लिए कोविड-19 के अलग बड़े अस्पताल की स्थापना के लिए कितनी तैयार है। अदालत ने कहा कि पौड़ी में स्थित लवाली प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाओं की बहाली और पानी का कनेक्शन लगाया जाए। तीसरी लहर के लिए यदि डॉक्टरों की कमी पड़ती है तो सुरक्षा बल सेना आदि के चिकित्सकों की सेवा लेने पर भी सरकार अभी से तैयारी करे।
डेथ ऑडिट अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला
राज्य सरकार की ओर से किया गया डेथ ऑडिट पूर्णतया अस्पष्ट और भ्रमित करने वाला है क्योंकि अधिकांश मृत्यु हृदय गति रुकने से बताई गई है। दूसरी लहर में कितने लोग मात्र कोविड-19 के कारण मरे यह नहीं बताया, साथ ही पूरे शपथ पत्र में स्वास्थ्य सचिव ने तर्कहीन तथ्य प्रस्तुत किए हैं। कोर्ट ने कहा की मृत्यु का ऑडिट करते समय कोर्ट के पूर्व आदेश का उल्लंघन करते हुए राज्य सरकार ने निकायों की ओर से जारी किए गए मृत्यु प्रमाण पत्रों के सापेक्ष मृत्यु की गणना नहीं की। इसलिए राज्य सरकार की ओर से कराए गए डेथ ऑडिट की सत्यता को कोर्ट द्वारा स्वीकार नहीं किया जा सकता।