बनारस के बाद हरिद्वार दूसरा ऐसा शहर है जिसकी विद्युत लाइनें पूरी तरह से भूमिगत कर दी गई हैं। बुधवार को मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत और केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री आरके सिंह ने वर्चुअल माध्यम से कुंभ मेला क्षेत्र में भूमिगत केबलिंग परियोजना का विधिवत लोकार्पण किया।
इस अवसर पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, विधायक प्रदीप बत्रा भी कार्यक्रम स्थल पर उपस्थित थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय की आईपीडीएस योजना के तहत हरिद्वार के कुंभ क्षेत्र में भूमिगत केबलिंग परियोजना को मंजूरी दी गई थी। इसके लिए केंद्र ने 388.49 करोड़ की धनराशि स्वीकृत की गई। उन्होंने भूमिगत के बलिंग का कार्य सफलतापूर्वक एवं समय पर पूर्ण कराने पर यूपीसीएल प्रबंधन की सराहना की।
इस परियोजना का क्रियान्वयन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी विजन के अनुरूप किया गया। इस प्रक्रिया में स्थानीय व्यक्तियों के हितों को सर्वोपरि रखा गया। कुंभ क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति में कोई भी व्यवधान उत्पन्न नहीं होगा। हरिद्वार के उपभोक्ताओं को 24 घंटे निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति हो सकेगी। इससे बारिश और आंधी-तूफान से तारों के टूटने और इससे होने वाली संभावित दुर्घटनाएं भी टल जाएंगी। रखरखाव के खर्च में कमी आएगी। वहीं आवासीय व वाणिज्यिक क्षेत्रों के सौंदर्यीकरण के लिए खुला स्थान उपलब्ध हो सकेगा। इसके साथ ही सड़कों का चौड़ीकरण भी आसानी से हो सकेगा, जिससे वाहनों का दबाव भी कम होगा। उन्होंने केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री का सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया।
केंद्रीय ऊर्जा राज्यमंत्री आरके सिंह ने अंडरग्राउंड केबलिंग से बिजली की गुणवत्ता में बहुत सुधार आता है। अंडरग्राउंड केबलिंग से विद्युत हानि में भी काफी कमी आएगी। उन्होंने इस प्रोजक्ट को जल्द पूर्ण करवाने के लिए सचिव ऊर्जा राधिका झा एवं यूपीसीएल के अधिकारियों को बधाई दी। आरके सिंह ने कहा हरिद्वार में अंडरग्राउंड केबलिंग को और विस्तार देने के प्रयास किए जाएंगे। अंडरग्राउंड केबलिंग से जुड़ने वाला बनारस के बाद हरिद्वार दूसरा शहर है। मुख्य सचिव ओमप्रकाश ने कहा कि भूमिगत केबल होने से यहां की आम जनता के साथ ही श्रद्धालुओं को भी काफी सहूलियत होगी। बिजली चोरी में भी कमी आएगी।