तमाम दावों के बाद भी पर्वतीय क्षेत्र के स्कूलों में अब तक पर्याप्त संख्या में शिक्षक नहीं हैं। सरकार से गुहार लगाकर स्थानीय निवासी भी हार गए तब सामाजिक संस्था हंस फाउंडेशन बच्चों की मदद को आगे आया और जिले के हिमालयी क्षेत्र से सटे गांवों के 28 सरकारी स्कूलों में 39 शिक्षक तैनात किए हैं। इन शिक्षकों को 8500 सौ रुपये से लेकर 15000 रुपये तक मानदेय भी संस्था की ओर से दिया जा रहा है। हंस फाउंडेशन की इस पहल से कोरोना काल में भी इन गांवों के बच्चों की पढ़ाई जारी है। हंस फाउंडेशन क्षेत्र के नौनिहालों को कंप्यूटर शिक्षा भी दे रहा है, जिसका लाभ 1718 विद्यार्थियों को मिल रहा है।
हंस फाउंडेशन ने शिक्षा के क्षेत्र में कार्य कर रही चिराग संस्था के माध्यम से करीब डेढ़ साल पहले हिमालयी क्षेत्र के सुविधा विहीन स्कूलों का कायाकल्प करने का बीड़ा उठाया था। संस्था ने शिक्षा विभाग से अनुमति लेकर पांच सरकारी इंटर कॉलेजों, 20 प्राथमिक विद्यालयों और तीन जूनियर हाईस्कूलों को संवारने का काम शुरू किया। इन इंटर कॉलेजों में जीआईसी खाती, सोराग, बदियाकोट, कर्मी और जीआईसी बघर, जूनियर हाईस्कूलों कर्मी, तीख और उमिया शामिल हैं।
इसके अंतर्गत इन स्कूलों में 39 शिक्षकों की तैनाती की। चयनित पांचों जीआईसी और तीन जूनियर हाईस्कूलों में कंप्यूटर लगाने के साथ कंप्यूटर शिक्षक भी तैनात किए। इंटर कॉलेजों में गेस्ट टीचर, प्राथमिक और जूनियर हाईस्कूलों में बाल शिक्षकों की भी तैनाती की गई। इंटर कॉलेजों में पुस्तकालय खोले हैं, जिनमें करीब पांच हजार पुस्तकें हैं। हंस फाउंडेशन गेस्ट टीचरों को 15 हजार, कंप्यूटर शिक्षकों को 12 हजार और बाल शिक्षकों को 8500 रुपये मानदेय देता है। गौर करने वाली बात यह है कि सभी शिक्षक स्थानीय हैं, जिन्हें घर पर रोजगार मिल रहा है।
संचार विहीन क्षेत्र में टैबलेट से हो रही पढ़ाई
पिंडरघाटी का इलाका संचार विहीन है, लिहाजा इस क्षेत्र में इंटरनेट एक सपना है। पर हंस फाउंडेशन ने मुंबई की संस्था ‘जाया लैब’ के जरिये प्राथमिक स्कूल खाती, बदियाकोट, किलपारा में 20-20 वाई फाई बॉक्स लगाए हैं। जिनकी सहायता से टैबलेट चलाए जाते हैं और बच्चों को अंग्रेजी, गणित की शिक्षा दी जाती है। उमला और सोराग में भी टैबलेट दिए गए हैं लेकिन यहां बिजली नहीं होने से पढ़ाई नहीं हो पा रही है।
फ्रांस के विद्यार्थी भी हंस के मुरीद
हंस फाउंडेशन के कार्य से प्रभावित होकर अगस्त 2019 में फ्रांस निवासी ई-कॉमर्स की विद्यार्थी इवा और प्राकृतिक ऊर्जा प्रबंधन (इनर्जी सिस्टम मैनेजमेंट) के विद्यार्थी पियरे इन स्कूलों में इंटर्नशिप (प्रशिक्षुता) के लिए पहुंचे। यह लोग एक महीने तक पिंडरघाटी में रहे। संस्था के कार्यों से काफी प्रभावित थे। पिंडरघाटी के जर्जर अवस्था में पहुंचे सभी 28 स्कूल भवनों की मरम्मत फाउंडेशन ने करवाई है। इन स्कूलों में 470 सेट फर्नीचर दिया गया है। कोरोना काल में भी विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हुई है।
एनबी अवस्थी परियोजना कंसलटेंट हंस फाउंडेशन